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बारिश ने अन्नदाताओं को पलेवा की सिंचाई से मिली राहत

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कस्बा भानपुर के खेतों में जमा बारिश का पानी - फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। जनपद में रविवार की रात से शुरू हुई बारिश के चलते सोमवार को भी पूरे दिन कहीं बूंदाबांदी तो कहीं झमाझम होती रही। इससे रबी की फसल की बुवाई की तैयारी के लिए पलेवा कर रहे किसानों को सिंचाई की सुविधा हो गई है। अब किसान सीधे खेतों की जुताई कर बुवाई कर सकेंगे। बारिश होने से सिंचाई का खर्च व समय बचने से किसानों की चेहरे खिल उठे हैं।
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अक्तूबर माह के दूसरे सप्ताह से रबी की फसल की बुवाई का सीजन शुरू हो जाता है। फसलों की बुवाई की तैयारियां किसानों ने शुुरू कर दीं थी। खरीफ फसल नष्ट होने से बर्बाद किसानों ने किसी तरह से रबी की फसल बुवाई के लिए खाद व बीज का इंतजाम कर लिया है। अब पलेवा के लिए सुविधा अनुसार इंतजाम कर रहे थे। कई क्षेत्रों में पलेवा का कार्य शुरू कर दिया था। कुछ किसान आर्थिक रूप से परेशान होने से फसल बीमा और सहायता राशि मिलने का इंतजार कर रहे थे।
रविवार की रात से शुरू हुई बारिश कहीं झमाझम तो कहीं बूंदाबांदी के बीच होती रही। सोमवार को भी पूरे दिन बारिश होने से खेतों में पर्याप्त मात्रा में पानी मिल गया है। अब किसानों को पलेवा करने की आवश्यकता नहीं है। बारिश से किसानों को सिंचाई के लिए बिजली व डीजल पंप चलाने की आवश्यकता नहीं है। इससे किसानों का समय बच गया है। बुवाई भी समय पर होने से पैदावार भी ठीक होगी।
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किसानों का कहना है कि अब बिना की परेशानी के आसानी से रबी की फसल की बुवाई कर लेंगे। बारिश से किसानों के चेहरे पर खुशी की लहर छाई है। अब एक दो दिन में खेतों में पानी कम होने पर किसान जुताई कर समय से बुवाई कर सकेंगे। जुताई के बाद बीज खाद का मिलान कर कर समय से बुवाई कर सकेंगे। इससे किसानों का लगभग लाखों रुपये का डीजल भी बच गया है और मेहनत भी बच गई है। किसानों केे अच्छी पैदावार होने की उम्मीद जाग गई है।
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यह है रबी की फसल की बुवाई का लक्ष्य
कृषि विभाग ने रबी की फसल की बुवाई की तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसकी बुवाई का लक्ष्य 306896 हेक्टेयर में बुवाई होगी। इसमें 1,72,384 हेक्टेयर में गेहूं, 10,114 हेक्टेयर में जौ बोया जाएगा। चना 19,585 हेक्टेयर, मसूर 23496 हेक्टेयर, मटर 75,122 हेक्टेयर, इसके अलावा तिलहन फसलों में 5,883 में सरसों और 172 हेक्टेयर में तोरिया की बुवाई की जाएगी। 135 हेक्टेयर के क्षेत्र में अलसी बोई जाने का लक्ष्य तय किया गया है।
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खरीफ की फसल नष्ट होने से आर्थिक रूप से अधिक कमजोर हो गए हैं। खेती के अलावा अन्य कोई आय का साधन नहीं है। बारिश से चिंता समाप्त हो गई है।
- संजू अहिरवार
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किसान को रबी की फसल की चिंता सता रही थी, अब बारिश होने से खेतों का पलेवा हो गया है। अब हजारों रुपये का डीजल की बचत हो गई है।
- छुट्टूराम
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पिछली फसल बर्बाद होने से किसानों को परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल हो रहा था। रबी की बुवाई में आर्थिक समस्या हो रही थी। बारिश ने पलेवा के खर्च की बचत कर दी है।
- कैलाश नारायण
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कर्ज से पूरी तरह से डूब गए हैं। बैंकों और साहूकारों से लिया कर्ज अब तक वापस नहीं कर पाया है। ऐसे में पलेवा के समय सिंचाई भगवान का वरदान साबित हो रहा है।
- मुरारीलाल दुबे सतौरा
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फसलों के लगातार नुकसान और कर्ज से परेशान बने हुए हैं। ऐसे में रबी की फसल की तैयारियां करना मुश्किल हो रहा था। अब बुवाई की उम्मीद जाग गई है।
- हरीराम निरंजन कलौथरा
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किसी तरह खाद व बीज का इंतजाम तो कर लिया था, पलेवा के लिए डीजल के पैसा जुटाने की तैयारी कर रहे थे। बारिश से पलेवा हो गया। अब सीधे खेत की जुताई कर बुवाई करेंगे।
- जयहिंद पाल जखौरा
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खेतों की जुताई कर डाल दिए थे। अब पलेवा की तैयारी चल रही थी कि रविवार व सोमवार को हुई बारिश से राहत मिल गई है। अब पलेवा नहीं करना होगा। सीधे बुवाई हो जाएगी।
- सुरेश राजपूत
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बीते दिनों से खेतों में पलेवा की शुरू कर दिया था, कुछ ही क्षेत्र में पलेवा हुआ था। अब बारिश से पलेवा की मेहनत, खर्च और समय भी बचत कर दी है। फसल की पैदावार अच्छी होगी।
- बद्रीनारायण कौशिक बिरौरा
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रबी की फसल की तैयारियों में जुटे थे। खेतों में पलेवा के लिए नहरों के आने का इंतजार करना पड़ता। समय से नहर न मिलने से फसल देर हो जाती है। बारिश से पलेवा हो गया है।
- भीष्म प्रताप सिंह बुंदेला, दैलवारा
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बारिश हो जाने से खेतों की सिंचाई नही करनी पड़ेगी, जिसमें होने बाले डीजल खर्च के बोझ से किसान अब बच गया है अब खेत अच्छे पानी से तल गये है अब बुबाई हो जाएगी।-हरी सिंह,किसान
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खरीब की फसल खराब हो जाने से कुछ नही निकला। डीजल मंहगा होने से जैसे तैसे खेतों की जुताई कर पाए थे। बारिश हो जाने से अब बुबाई हो जाएगी।-ब्रजेंद्र सिंह, किसान
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बारिश होने से अब किसानों को खेतों में पलेवा करने की आवश्यकता नहीं है। इससे किसानों को पलेवा के खर्चे की बचत होगी। किसान समय पर बुवाई कर सकेंगे। इससे दलहनी फसलों के बीच भी ठीक तरह से अंकुरित होंगे। इससे अधिक फायदा दलहनी फसल चना, मटर, मसूर को होगा। गेहूं व जौ की बुवाई में नवंबर माह से शुरू होती है।
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नितिन कुमार यादव, कृषि वैज्ञानिक

पानी से फसल हुई खराब- फोटो : LALITPUR

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