मड़ावरा। क्षेत्र में सोमवार को झमाझम बारिश होने से जहां लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली। वहीं, खेतों में जलभराव होने से किसानों के चेहरे खिल गए। करीब एक घंटा तेज बारिश के बाद काफी देर तक फुहारों के गिरने से लोगों ने राहत महसूस की। वहीं, किसानों की खड़ी फसलों को नुकसान भी पहुंचा है।
गौरतलब है कि रबी के सीजन के लिए मटर, चना, मसूर आदि जिंसों की बोहनी का समय चल रहा है जिसके लिए खेतों को तैयार करने के लिए पलेवा किए जाने का काम चल रहा था। सोमवार को हुई बारिश अमृत की तरह साबित होती दिख रही है। किसानों का मानना है कि अच्छा पानी गिरने से किसानों का लाखों रुपयों का डीजल और बिजली के साथ मेहनत में भी राहत मिलेगी।
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इस बार रोहिणी बांध खाली रहने से छपरौनी माइनर के इलाके में लगभग एक हजार एकड़ कृषि रकबे में बोहनी की कोई उम्मीद नहीं थी लेकिन पलेवा लायक बारिश हो जाने से अब खेती की उम्मीद जागी है। - मलखान सेन, ग्राम रनगांव
अभी हाल ही में बोर कराया था। जिसमें टरबाइन डालकर पलेवा करने की तैयारी थी, इसमें एक ड्रम डीजल खर्च होना था। क्षेत्र में अचानक अच्छी बारिश हो जाने से खेतों में पलेवा करने का खर्च बच गया। - सजन सिंह, हंसरा गांव
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कम लागत वाली पारंपरिक सफेद मटर की बोहनी करने का मन बनाए थे, लेकिन बारिश होने से पलेवा करने में जो खर्च बच गया है। अब खेत में 14 हजार रुपये प्रति क्विंटल वाली उन्नतशील दंतेवाड़ा हरी मटर बोएंगे। - मर्दन रजक, ग्राम साढूमल