ललितपुर। यातायात में नदियों के क्षतिग्रस्त पुल बाधा बने हुए हैं। कुछ स्थानों पर तो आवाजाही पूरी तरह ठप है। लोग कई किलोमीटर का चक्कर आ-जा रहे हैं। इससे समय की बर्बादी हो रही है। वहीं, कुछ स्थानों पर लोग जान जोखिम में डालकर निकल रहे हैं। पेश है कुछ पुलों का हाल...।
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दृश्य एक
कस्बा बांसी के पुराना बार रोड पर शहजाद नदी का रपटा डूबा गया है, जो महज वर्ष में दो से तीन माह के लिए निकलता है। लोगों को गड़िया मार्ग से होकर जाना पड़ता है। झांसी की ओर आवागमन करने वालों को पांच से छह किमी का चक्कर लगाना पड़ता है। वहीं, रपटा निकलने पर जान जोखिम में डालकर निकलते हैं। लगभग 20 वर्ष से पुल का रपटा डूबा हुआ है। इसके बाद भी जिम्मेदारों ने पुल की सुध नहीं ली। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल निर्माण होने से रोजगार के साधन भी बढ़ जाएंगे।
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दृश्य-दो
धौर्रा से बालाबेहट मार्ग पर मुड़ारी गांव के बीच से सौंर नदी निकली है। नदी पर अब तक पुल का निर्माण नहीं हो सका है। ऐसे में मार्ग से पांच माह आवागमन बंद रहता है। नदी गांव के बीच से निकली है। नदी में पानी होने पर ग्रामीण व स्कूली बच्चे रस्सी के सहारे जान जोखिम में डालकर निकलने को मजबूर हैं। वहीं, धौर्रा से बालाबेहट होकर मध्यप्रदेश के लिए मार्ग बंद हो जाता है। इससे लगभग दर्जनों गांव के लोगों को 60 किलोमीटर का चक्कर लगाकर जाखलौन से पाली होकर आवागमन करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि 22 वर्ष पहले प्रस्ताव बना था, एक दो फीट तक पिलर बनाए थे, बीच में कार्य बंद हो गया।
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दृश्य तीन
शहर में शहजाद नदी पर सुरई घाट पंचमुखी हनुमान मंदिर पुल पर छह वर्ष पहले पानी आने से यह क्षतिग्रस्त हो गया था, तब से अब तक इसका निर्माण नहीं किया जा सका। इससे शहर की ओर से बानपुर, टीकमगढ़ समेत आसपास के गांव के लोगों को चार किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ रहा है। प्रत्येक वर्ष जलविहार के पर्व पर नगर पालिका क्षतिग्रस्त पुल के मार्ग में मिट्टी डालकर रास्ता बनवा देती है, जो बारिश के मौसम में पानी आने पर बह जाता है। इससे पांच माह पैदल निकलना तक बंद हो जाता है।
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दृश्य चार
पूराकलां से पारौन होकर बार जाने वाले मार्ग पर हजारिया और सारसेड़ के बीच शहजाद नदी के क्षतिग्रस्त पुल का रपटा नदी में तेज प्रवाह से दस वर्ष पहले बह गया था। तब से अब तक इस मार्ग से आवागमन बंद पड़ा है। लोग हसारकलां भुचेरा से होकर बार पहुंच रहे हैं, इससे लगभग 20 किमी का चक्कर लगाना पड़ रहा है। नदी में पानी सूखने पर दो पहिया वाहनों से लोग इस मार्ग से आवागमन कर लेते हैं। धमना, सारसेड, हजारिया, बघौरा, ककरेला, नयाखेड़ा, रजपुरा खैरा, बटवाहा, लड़वारी सहित लगभग 30 गांव के लोग परेशान हैं।