ललितपुर। खरीफ फसलों में पीला मोजेक रोग और अन्य रोगों से बचाव के लिए किसानों को जानकारी दी गई। कृषि विशेषज्ञों ने खरीफ फसल उड़द, मूंग और सोयाबीन में पीला मोजेक रोग का प्रकोप दिखाई देने पर किसानों को उचित नियंत्रण के उपाय अपनाकर फसलों को प्रभावित होने से बचाव के तरीके बताएं।
जिला कृषि अधिकारी राजीव कुमार भारती ने बताया कि खरीफ फसलों में पीला मोजेक रोग से उड़द/ मूंग का उत्पादन प्रभावित होता है। इसके साथ - साथ फसलों पर माहू कीट का प्रकोप भी दिखाई पड़ता है। पीला मोजेक रोग की पहचान करने के लिए लगातार निगरानी करें। इस रोग की शुरूआत में पत्तियों पर पीले सुनहरे चकत्ते बन जाते हैं और बाद में पूरी पत्ती पीली पड़ जाती है। इसके बाद पूरा पौधा - पीला हो जाता है। सफेद मक्खी इस रोग की वाहक होती है। किसान पीला चितवर्ण रोग (पीला मोजेक) रोग का प्रकोप होने पर खेत से रोगी पौधों को उखाड़कर मिट्टी में दबाकर नष्ट कर दें। पांच प्रतिशत से अधिक पौधे प्रभावित दिखाई देने पर पीला मोजेक और माहू कीट के नियंत्रण के लिए फसल में कीट नाशक और फफूंदी नाशक रसायनों का भी फसल में छिड़काव करें। उड़द और मूंग की फसल में इल्ली का प्रकोप दिखाई देने पर इल्ली और फली भेदक के नियंत्रण के लिए भी कीट नाशक दवाओं का प्रयोग करें। इसमें विभाग द्वारा दो नंबर 9452247111 व 9452257111 जारी किए गए हैं। किसान पंजीकरण नंबर या अपना नाम, ग्राम का नाम, विकास खंड, जनपद का नाम व फसल में लगने वाले कीट/रोग का नाम, लक्षण/ फोटो के साथ एसएमएस/ व्हाट्सअप भेजकर समाधान पा सकते हैं।
कीट नाशक दुकानदार लगाएं रेट बोर्ड
जिला कृषि अधिकारी ने कीटनाशक विक्रेताओं को दुकान के बाहर रेट बोर्ड, स्टॉक बोर्ड लगाए जाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रत्येक कृषक को बिल/ कैश मेेमो जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही किसानों को कृषि रक्षा रसायन के प्रयोग के बारे में आवश्यक प्रयोग विधि की जानकारी देने के निर्देश दिए।