ललितपुर। मानस मर्मज्ञ प्रेम भूषण महाराज ने कहा कि संसार में उत्सव का अवसर मिले तो उत्साह से मनाने की कोशिश करो। उन्होंने कहा कि कोविड में बच गए यही भगवान की दी पूंजी समझो। उन्होंने राजा दक्ष यज्ञ, शिव विवाह की कथा का वर्णन करते हुए उनकी महिमा का बखान किया। वह रविवार को प्रेमांगन गार्डन में चल रही श्री राम कथा का वर्णन कर रहे थे।
मानस मर्मज्ञ प्रेम भूषण महाराज ने कहा कि मनुष्यों की सोच व स्वभाव कभी एक जैसा होना संभव नहीं होता है। यदि सोच मिले व स्वभाव न मिले तो काम तो चलता है और सोच और स्वभाव दोनों मिल जाएं तो सारे काम चल पड़ते हैं। झूठा व्यक्ति झूठ इतनी सफाई से बोलता है कि वह सच लगने लगता है। ये उसके स्वभाव में रहता है। कोई सच बोले लेकिन कुछ ही लोग उसे सच मानते हैं। इस प्रकार से सोच एवं स्वभाव एक नही हो सकती है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम की सोच एवं स्वभाव के कारण ही मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम कहा जाता है।
मानस मर्मज्ञ ने कहा कि दक्ष प्रजापति सृष्टि निर्माता भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्र थे। राजा दक्ष के दो पुत्र, 84 पुत्रियां थी। दक्ष प्रजापति ने अपनी 27 कन्याओं का विवाह चंद्रदेव के साथ किया था। इन 27 कन्याओं में रोहिणी सबसे अधिक सुंदर थीं। चंद्रमा रोहिणी से सर्वाधिक प्रेम करते थे और अन्य 26 पत्नियों की अनदेखी करते थे। उन कन्याओं ने यह बात अपने पिता दक्ष को बताई तो वह बहुत दुखी हुए, उन्होंने चंद्रमा को आमंत्रित कर इस अनुचित व्यवहार के लिए सावधान किया। चंद्रमा ने अपनी गलती स्वीकार कर ली और वचन दिया कि वो भविष्य में ऐसा भेदभाव नहीं करेंगे परंतु ऐसा हुआ नहीं, चंद्रमा ने अपना भेदभावपूर्ण व्यवहार जारी रखा।
दक्ष प्रजापति और चंद्रमा के बीच बात इतना बढ़ गई कि अंत में क्रोधित दक्ष ने चंद्रदेव को कुरूप होने का श्राप दे दिया। नारदमुनि ने चंद्रमा से कहा कि वो श्राप मुक्ति के लिए भगवान शिव से प्रार्थना करें। चंद्रमा यह बात जानते थे कि भगवान शिव का विवाह सती से होने वाला है। उन्हें लगा कि शिव उनकी सहायता क्यों ही करेंगे। कुछ दिन बाद नारद घूमते हुए दक्ष के दरबार में पहुंचे और उन्होंने चंद्रमा की श्रापमुक्ति के बारे में उन्हें बताया। दक्ष को बड़ा क्रोध आया कि उनके श्राप को किसने विफल कर दिया। नारद जी से जानकर दक्ष शिव से युद्ध करने कैलाश पर्वत पहुंच गए। शिव और दक्ष का युद्ध होने लगा। इस युद्ध को रोकने के लिए ब्रह्मा और भगवान विष्णु वहां पहुंचे। ब्रह्मा जी ने चंद्रमा के शरीर से एक नए चंद्रमा की उत्पत्ति कर दी। भगवान विष्णु ने कहा कि दक्ष के श्राप अनुसार पहले चंद्रमा की सुंदरता कुछ दिन घटेगी और कुछ दिन बढ़ेगी, साथ ही चंद्रमा को अपनी पत्नियों से समानता का व्यवहार करना होगा। शिव जी के वरदान प्राप्त दूसरे चंद्रमा को शिव के साथ रहना होगा। उन्होंने भगवान शिव और पार्वती के विवाह की कथा का वर्णन कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
ये लोग रहे मौजूद
अनिल चौबे, सुशील चौबे, निखिल रामकुमार तिवारी, अज्जू बाबा, अजय पहलवान, शरद तिवारी, इंद्रेश तिवारी, हैप्पी यादव, मनु चौबे, सोनू बैद्य, सोनू दुबे, रमेश दुबे, गोविंद नारायण रावत, कृष्णदेव लिटौरिया, राजेश दुबे, अवधेश कौशिक, रविकांत दीक्षित, अजय नायक सिंदवाहा, धर्मेंद्र गोस्वामी बॉबी, अतुल कौशिक, आशीष तिवारी, दिनेश गोस्वामी, अमित तिवारी, संदीप बबेले, रविकांत तिवारी, अंकित कौशिक, सचिंद गोस्वामी, निखिल बिदुआ, बबूल पाठक, शुभम देवलिया, आदित्य दुबे, अनुज चतुर्वेदी, राहुल चौबे, राहुल व्यास, राजीव कटारे, विष्णु दुबे, सुनील पटैरिया, पुष्पेंद्र कश्यप, विवेक भारद्वाज, श्यामाकांत चौबे,, रमेश रावत, जगदीश पाठक,चंद्रशेखर राठौर, हरि मोहन चौरसिया, रतनेश तिवारी, हरविंदर सलूजा, अवधेश कौशिक, शिव शर्मा, राकेश तामियां, धर्मेंद्र चौबे, मुन्ना त्यागी आदि मौजूद रहे।