फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आबादी दो लाख, कूड़ाघर महज एक दर्जन

Mon, 15 Aug 2016 01:25 AM IST
lalitpur
विज्ञापन
dustbin - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
ललितपुर। शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए शासन व नगर पालिका द्वारा तमाम प्रयास के साथ करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसे विभागीय उदासीनता ही कहेंगे कि शहर में नगर पालिका द्वारा बनाए स्थायी कूड़ाघर अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं। शहर के लगभग सभी मुहल्लों की मुख्य सड़कों पर कूड़ा घर बने हुए थे, लेकिन वर्तमान में पूरे शहर में केवल एक दर्जन ही कूड़ा घर शेष रह गए हैं। स्थानीय लोगों द्वारा कूड़ाघर को हटाकर अतिक्रमण कर लिया गया है।
विज्ञापन


26 वार्डों वाले शहर की आबादी दो लाख का आंकड़ा पा चुकी है। शहर के मुहल्लों व बाजारों से प्रतिदिन पांच मैट्रिक टन कचरा गलियों व सड़कों से उठाया जाता है। एक दिन का कचरा एकत्रित करने के लिए मुहल्लों व बाजारों में नगर पालिका द्वारा पूर्व में स्थायी कचरा घर का निर्माण कराया गया था, इलाके का सारा कचरा इन्हीं कूड़ा घरों में एकत्रित किया जाता था और फिर विभाग के ट्रैक्टर-ट्राली व अन्य साधनों से उठा लिया जाता था। शहर के लगभग सभी वार्डों व बाजारों में नगर पालिका के स्थायी कूड़ा घर बने हुए थे, लेकिन विभाग की उदासीनता के चलते वर्तमान में एक दर्जन स्थाई कूड़ा घर भी शेष नहीं रह गए हैं। स्थानीय लोगों द्वारा इन स्थानों पर अतिक्रमण कर लिया गया है। विभाग द्वारा भी इन अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है, इससे मुहल्ले के लोग कचरा डालने स्थान के लिए परेशान हो रहे हैं।

सफाई कर्मचारियों की लापरवाही बनी मुसीबत
कूड़ाघरों के बंद होने के पीछे का मुख्य कारण नगर पालिका के सफाई कर्मचारियों की लापरवाही है। मुहल्लों की गलियों और घरों से निकलने वाला कचरा इन कूड़ाघरों में डाला जाता था, लेकिन वर्तमान में सफाई कर्मचारियों द्वारा यह कचरा अब कूड़ाघरों के बाहर की डाल दिया जाता है। नगर पालिका कचरा उठाने के लिए मशीनों का उपयोग करने लगा है, मशीनों से कूड़ाघरों के अंदर से कचरा निकालने में दिक्कत आती है, इसलिए कर्मचारी भी कूड़ाघरों के बाहर ही कचरा फैंकने लगे है। जब मशीन से कचरा का उठान किया जाता है, तो भारी मात्रा में कचरा सड़कों पर फैल जाता है। सड़कों पर फैला कचरा कीचड़ में तबदील हो जाता है और आस-पास भीषण गंदगी जमा हो जाती है। इस गंदगी के कारण स्थानीय लोगों को समस्या खड़ी होने लगती है और फिर स्थानीय लोगों द्वारा कूड़ाघर बंद कराने व स्थान परिवर्तन की मांग तेज हो जाती है। यही करण है कि कई जगहों के कूड़ाघर स्थानीय लोगों के विरोध के कारण बंद हो गए हैं।
विज्ञापन


हमें भी है सुधरने की जरूरत
नगर पालिका के लापरवाह सफाई कर्मचारियों के साथ-साथ हम आम जनता को भी अपनी आदत सुधारने की अति आवश्यकता है। कर्मचारी सुबह के समय मुहल्लों की सफाई कराके चले जाते हैं। इसके बाद स्थानीय लोगों द्वारा ही गलियों में गंदगी फैलाई जाती है। शहर के सभी मुहल्लों में नगर पालिका द्वारा कूड़ा एकत्रित करने के लिए बड़े-बड़े डस्टबिन रखवाए गए हैं। इन डस्टबिनों के भीतर कचरा डालने के लिए मेहनत न करना पड़े इसके लिए लोग दूर से ही डस्टबिन में कचरा फेंकने की कोशिश करते हैं और कचरा डस्टबिन के बाहर जमा होता चला जाता है। आवारा जानवरों द्वारा यह कचरा कुछ समय बाद गलियों व सड़कों पर फैलाना शुरु हो जाता है।

इन कूड़ाघरों का अस्तित्व हो गया खत्म
शहर के लगभग समस्त वार्डों, बाजार व घनी आबादी वाले क्षेत्रों में नगर पालिका के प्राचीन स्थायी कूड़ा घर बने हुए थे, वर्तमान में एक दर्जन कूड़ाघर भी संचालित नहीं किए जा रहे हैं। शहर के वार्ड नंबर 05 में बजरियापुरा के कूड़ाघर स्थल पर अतिक्रमण करके खोखा संचालित किया जा रहा है। वार्ड नंबर 9 में कटरा बाजार में स्थित कूड़ाघर को नगर पालिका ने स्वयं मिटाकर दुकानों का निर्माण करा दिया है। वार्ड नंबर 17 में इमान चौक के पास बने कुड़ाघर स्थल पर भी नगर पालिका ने दुकान का निर्माण करा दिया है। वार्ड नंबर 25 में मुहल्ला चौबयाना प्राइमरी स्कूल के पास कूड़ाघर स्थल पर अस्थाई दुुकान संचालित की जा रही है। वार्ड नंबर 19 में बीड़ी खारखाने के पास बने कूड़ाघर स्थल पर स्थायी दुकान बना ली गई है। वार्ड नंबर 24 नझाई बाजार में कूड़ाघर को हटाकर खोखे संचालित किए जा रहे हैं। इसी तरह मुहल्ला नदीपुरा, चौबयाना, रावर स्कूल के सामने व अन्य स्थानों पर बने कूड़ाघरों को हटा दिया गया है। कई जगहों पर कूड़ाघर बंद कराने के लिए लोगों ने भगवान को इस्तेमाल करना भी नहीं छोड़ा है, वार्ड नंबर 01 के मुहल्ला खिरकापुरा में, रावर स्कूल के पीछे, गुडलक होटल के बागल में व अन्य स्थानों पर लोगों ने कूड़ाघर हटाकर चबूतरा बना दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें