ललितपुर/डोंगराखुर्द। विंध्याचल पर्वत के मध्य जमीन से करीब सौ फीट ऊंचाई पर चंडी माता विराजमान हैं। कस्बा नाराहट से महज दो किलोमीटर दूर दौलतपुर गांव के निकट व दूसरा रास्ता मध्यप्रदेश के अटा गांव से जाता है। नवरात्र शुरू होते ही यहां भक्तों का तांता लग जाता है। चंडी माता को चंदेरी में जागेश्वरी देवी का स्वरूप माना जाता है। शक्ति की देवी का यह मंदिर प्राकृतिक हरे-भरे घने जंगल में है। इस प्राचीन मंदिर तक पहुंचने के लिए पहाड़ी के किनारे कच्चे कंकरीले पथरीली रास्ते से होते हुए जाना पड़ता है। यहां पर्यटन विकसित नहीं है जबकि यह पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है। यहां पर बरसात के दिनों में बड़ी मुश्किल से लोग पहुंच पाते हैं।
मंदिर सुंदर प्राकृतिक घने जंगलों के परिवेश और पहाड़ियों की पृष्ठभूमि के बीच स्थित है। मान्यता के अनुसार मां चंडी अपने मढ़ की छत तोड़कर चंदेरी मध्य प्रदेश के पर्वत की तलहटी में पहुंच गई थीं, जहां उन्हें जागेश्वरी माता के नाम से जाना जाता है। नाराहट स्थित चंडी मंदिर में माता के धड़ एवं पैरों की पूजा होती है, जबकि जागेश्वरी चंदेरी में सिर की पूजा होती है। मढ़ तोड़ने के साक्ष्य यहां मौजूद है, किंतु वर्तमान में स्थानीय लोगों ने मंदिर पर सीमेंट की छत का निर्माण करा दिया है। मंदिर के आसपास जंगलों में पत्थर की मूर्तियां बिखरी पड़ी हैं जो की बहुत ही प्राचीन हैं।
नवरात्र पर दर्जनों गांव के सैकड़ों श्रद्धालु चंडी माता मंदिर में आते हैं। मंदिर का रास्ता भले ही दुर्गम हो किंतु श्रद्धालुओं के मन की आस्था प्राकृतिक वातावरण में खींच ले जाती है। इस मंदिर परिसर में प्राकृतिक झरना बहता है।
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आल्हा ऊदल की कचहरी हो रही खंडहर
मंदिर से महज 200 मीटर की दूरी पर स्थित आल्हा ऊदल की कचहरी के नाम से प्रसिद्ध पत्थर का किला है। स्थानीय लोगों के मुताबिक यहां पर आल्हा ऊदल प्राचीन समय में जनसुनवाई करते थे एवं लोगों की समस्याओं का निस्तारण करते थे। वर्तमान में यह किला पर्यटन विभाग की उपेक्षा के कारण खंडहर बन चुका है। किले के पास ही एक जलकुंड है जहां वर्ष भर पानी बना रहता है इस कुंड में जंगल की पशु पक्षी पानी पीने के लिए आते दिख जाते है साथ ही यहां पर आने वाले पर्यटक भी इसी कुंड़ के पानी का उपयोग करते हैं।
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नवरात्र में यहां माता रानी का विशेष पूजन अर्चन होता है। इस साल कोविड गाइडलाइन के अनुसार पूजन अर्चन और दर्शन कराए जाएंगे। मंदिर की पहाड़ी स्थित की एक गुफा में पिछले बारह साल से रह रहा हूं। बरसात के मौसम ज्यादा परेशानी होती है सांप बिच्छू गुफा से निकलते है माता की कृपा से यहां पड़ा रहता हूं। रमलू बाबा, चंडी मंदिर नाराहट।
चंडी मंदिर नाराहट- फोटो : LALITPUR