ललितपुर। प्रदेश सरकार ने पुराने खनिज भंडारण लाइसेंस निरस्त कर दिए गए हैं। डेढ़ माह बीतने के बाद भी खनिज विभाग में कोई स्टाक (टाल) पंजीकृत नहीं है। इसके बावजूद शहर में कारोबारी धड़ल्ले से बालू और गिट्टी बेच रहे हैं, जिससे खनिज विभाग के राजस्व को चूना लग रहा है।
प्रदेेश सरकार ने अवैध खनन को रोकने के लिए वर्ष 2018 खनिज नीति लागू की है, जिसमें पुराने लाइसेंसों को निरस्त कर दिया गया है। फुटकर विक्रेताओं के लिए पोर्टल जारी किया गया है, जिसके माध्यम से कारोबारी लाइसेंस बनवा कर खनिज सामग्री का स्टाक कर बिना किसी रोक टोक के कारोबार कर सकें। वर्तमान में पुराने लाइसेंसों को निरस्त हुए लगभग डेढ़ माह बीतने के बाद खनिज विभाग में एक भी लाइसेंस का पंजीयन नहीं हुआ है। इसके बावजूद शहर के अवैध टालों का कारोबार धड़ल्ले से चलाया जा रहा है, जिससे अवैध खनन पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। वहीं, अवैध खनन का कारोबार चलने से खनिज विभाग के राजस्व को क्षति पहुंचाई जा रही है।
ऐसी ही स्थिति शनिवार को शहर के विभिन्न स्थानों पर देखने को मिली। यहां पर पूर्व की भांति खनिज टालों का संचालन हो रहा है। शहर में बस स्टैंड के पास, राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र के पास, देवगढ़ रोड़ पर जुगपुरा में, गोविंद सागर बांध के पास, मसौरा बैरियर के आगे, साथ ही शहर के बाईपास सड़क पर कई जगह, कैलगुवां चौराहे पर खनिज टालों का संचालन पूर्व की भांति ही किया जा रहा है। गल्ला मंडी के सामने, सिविल लाइन, बाईपास सड़क, चौकाबाग के पास पत्थर की टालें भी नियमों के विपरीत चलाई जा रही हैं। यह टाल संचालक सड़क के किनारे पर ही संचालित कर रहे हैं, जिससे दुर्घटनाएं होने की संभावनाएं बनी रहती हैं। गिट्टी या बालू लोड होने से सड़क पर यातायात भी प्रभावित हो रहा है। इसके बावजूद टाल संचालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
शहर में टालों के संचालन होने का मामला सामने आया है, जिसकी मौके पर जाकर जांच की जाएगी। सौ घन मीटर से अधिक मात्रा में खनिज पाए जाने पर संबंधित भंडारण को जब्त किया जाएगा। साथ ही विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
- आर पी सिंह, जिला खान अधिकारी