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छात्र-छात्राओं को साइबर क्राइम से बचने को बताए महत्वपूर्ण सुझाव

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नेहरू महाविद्यालय बैठक में मौजूद प्रोफेसर - फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। विश्व एड्स दिवस के अवसर पर नेहरू महाविद्यालय में एड्स एवं साइबर क्राइम जागरूकता विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें वक्ताओं ने साइबर क्राइम से बचने के महत्वपूर्ण सुझाव और उपाय दिए।
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संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्राचार्य डॉ. ओमप्रकाश शास्त्री ने कहा कि एड्स एक लाइलाज भयानक एवं खतरनाक बीमारी है, जिससे सदैव बचना चाहिए क्योंकि सावधानी ही बचाव है।
उन्होंने कहा कि अपराध की दुनिया में अब साइबर अपराधियों का दबदबा निरंतर बढ़ता ही जा रहा है। इंटरनेट के बढ़ते उपयोग के चलते साइबर अपराधी सीधे साधे लोगों को आसानी से अपना शिकार बनाने में सफल हो रहे हैं। मोबाइल का उपयोग जहां एक तरफ विद्यार्थियों के लिए ज्ञानार्जन का अच्छा माध्यम है। वहीं उसका सही उपयोग न करने वालों को गलत दिशा भी देता है। डॉ. अनिल सूर्यवंशी ने कहा कि देश में साइबर बुलिंग के मामलों में दिन-प्रतिदिन बढ़ोतरी हो रही है। साइबर बुलिंग का सीधा-सा मतलब है ई-मेल, फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, ट्विटर आदि पर संपर्क साधकर धमकाने, ब्लैकमेल करने, गाली-गलौज करने, मानसिक रूप से प्रताड़ित करके अपराधी अपना काम बनाने में सफल हो जाते हैं।
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डॉ. हरिशचंद दीक्षित ने कहा कि विगत वर्ष से कोरोना महामारी के चलते इंटरनेट का उपयोग तेजी से बढ़ा है और इसके बढ़ने के साथ ही साइबर अपराधियों का आतंक और अधिक बढ़ने लगा है। सोशल मीडिया पर साइबर अपराधी अधिक सक्रिय हैं। ई-मेल, फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, ट्विटर पर साइबर अपराधी अति सक्रिय हैं। साइबर अपराधियों के लिए बच्चे सॉफ्ट टारगेट हैं और लालची, डरपोक किस्म के लोग भी इनके झांसे में जल्दी आ जाते हैं, इसलिए इससे सजग रहना आवश्यक है।
नोडल अधिकारी डॉ. ओपी चौधरी ने कहा कि एड्स और साइबर क्राइम दोनों ही मानव जीवन के लिए खतरनाक हैं, साइबर अपराधी इंटरनेट व कंप्यूटर की दुनिया के अच्छे जानकार होते हैं। ये आपकी मेल या व्हाट्सएप को हैककर, सोशल मीडिया पर आपके नाम से गलत व भ्रामक सूचना अपलोड कर ठगी करने में सफल हो जाते हैं। हमें उनके इस प्रकार के शिकंजे से सावधान रहने की आवश्यकता है। सावधानी और सजगता ही साइबर अपराधियों से बचने का कारगर उपाय है। डॉ. बलराम द्विवेदी ने कहा कि जब भी इस तरह की कोई घटना आपके साथ हो रही हो तो तत्काल पुलिस की सहायता लेनी चाहिए। डरना या ब्लैकमेल से तनाव में आना इसका निदान नहीं है। इस अवसर पर डॉ. अरिमर्दन सिंह, डॉ. रामकुमार रिछारिया, डॉ. अवनीश त्रिपाठी, डॉ. जगत कौशिक, डॉ. लक्ष्मीकांत मिश्रा, डॉ. सुनील शुक्ला, डॉ. अनूप दीक्षित, संतोष सिंह, डॉ. इं. सौरभ श्रीवास्तव, डॉ. विनीत अग्निहोत्री, प्रो.जितेंद्र राजपूत, विवेक पाराशर, फहीम बख्श, ध्रुव किलेदार, राजीव गोस्वामी, हरीप्रसाद, आशीष शर्मा, जयंत चौबे, संजय शर्मा, अंकित चौबे, भगवती प्रसाद, कामता प्रसाद शर्मा, हरदयाल, कमलेश, राकेश प्रजापति, रवि कुमार, मिलन सेन उपस्थित रहीं।
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