ललितपुर। ब्लॉक जखौरा अंतर्गत ग्राम कालापहाड़ निवासी गर्भवती महिला ने मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि जिला अस्पताल में उसकी कोराना जांच की गई पाजिटिव पाए जाने पर उसे तालबेहट रेफर किया गया. यहां से एंबुलेंस से उसे झांसी मेडिकल कालेज भेजा गया, जहां पर मेडिकल कालेज के गेट पर एंबुलेंस चालक उसे छोड़कर भाग गया। बाद में परिजनों को सूचना देने पर वह मेडिकल कालेज के अंदर ले गए तथा उसकी फिर से कोरोना जांच कराई गई तो वह निगेटिव निकली। इसके बाद फिर से ललितपुर लौटकर शुक्रवार को उसका जिला अस्पताल ललितपुर में ही प्रसव कराया गया।
एंबलेंस कर्मी मानवीय संवेदनाएं भूलकर कोरोना संक्रमित महिला को मेडिकल कॉलेज झांसी के गेट पर अकेला छोड़ आए। महिला गेट के बाहर बैठकर रात बिताने को मजबूर हो गई। बाद में परिजनों ने वहां पहुंचकर उसकी जांच कराई।
ब्लॉक जखौरा अंतर्गत ग्राम कालापहाड़ निवासी 20 वर्षीय महिला गायत्री को प्रसव के लिए परिजन 21 अगस्त को जिला महिला अस्पताल ललितपुर में लाए, जहां पर महिला की कोरोना जांच कराए जाने पॉजिटिव पाई गई। जिस पर 23 अगस्त को होमक्वारंटीन किया गया।
अचानक 24 अगस्त को एक एंबुलेंस आकर उसके घर के सामने रुकी और महिला को ले जाने के लिए कहा, जिस पर पीड़ित ने होमक्वारंटीन रहने के लिए कहा, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम तालबेहट ले जाने के लिए अड़ गई। मना करने पर पुलिस ने अंजाम भुगतने की धमकी दे डाली। इस पर पीड़ित डर गया और गर्भवती होने के कारण घर के एक सदस्य को साथ जाने की मिन्नत की, लेकिन धमकी और अमानवीयता के चलते उनकी एक न चल सकी।
परिजनों का आरोप है कि एंबुलेंस चालक गर्भवती गायत्री को तालबेहट न ले जाकर झांसी मेडिकल कालेज के गेट पर छोड़कर चलता बना। किसी दूसरे से मोबाइल लेकर महिला ने घर पर झांसी मेडिकल कालेज के गेट पर होने की बात बताई। महिला को पूरी रात सड़क की फुटपाथ पर बितानी पड़ी। 25 अगस्त को अपने रिश्तेदारों को सूचना दी, जिन्होंने मौके पर पहुंचकर मेडिकल कालेज के चिकित्सकों से कोरोना जांच कराए जाने की मांग की, इसमें महिला की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई। इस पर परिजन उसे लेकर अपने घर काला पहाड़ चले आए।
28 अगस्त को महिला के परिजनों ने गर्भवती को प्रसव पीड़ होने पर जिला महिला अस्पताल लाए, जहां पर उसे कड़ी मशक्कत के बाद भर्ती किया गया। यहां पर शुक्रवार की शाम छह बजे के बाद महिला का सामान्य प्रसव हुआ और उसने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। आरोप है कि जब परिजनों ने अस्पताल पहुंचकर जब अस्पताल प्रशासन से बीते दिनों पाजिटिव होने की रिपोर्ट मांगी तो अभद्रता की।
जिला अस्पताल में महिला की कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई, इसके तीन-चार दिन बाद मरीज की रिपोर्ट निगेटिव आ सकती है। - डॉ. प्रताप सिंह मुख्य चिकित्सा अधिकारी