- एक वर्ष पूर्व शासन ने दिए थे निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जनपद में अब तक मॉडल एंटी रैबीज क्लीनिक संचालित नहीं हो सकी है। महज सामान्य काउंटर के माध्यम से ही वैक्सीन लगाई जा रही है। इससे आवारा कुत्ताें व अन्य जानवरों के हमले से घायल मरीजों को समुचित सुविधा नहीं मिल पा रही है। हद तो यह है कि जब शासन ने एक वर्ष पूर्व पत्र जारी कर निर्देश दिए थे, तब भी सुविधा धरातल पर नहीं उतर सकी है।
इधर, आवारा कुत्तों के हमले की घटनाएं लगातार बढ़ रहीं हैं। जनपद में प्रतिमाह लगभग चार से पांच सौ लोग कुत्ता, बंदर, बिल्ली व अन्य जानवरों के शिकार हो जाते हैं। इन मरीजों को बेहतर उपचार की सुविधा देने के लिए शासन ने जिला अस्पताल में मॉडल एंटी रैबीज क्लीनिक बनाने के निर्देश दिए थे। साथ ही सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी रैबीज क्लीनिक खोले जाने थे। इसके लिए जुलाई 2025 में पत्र जारी कर संचालित करने के निर्देश दिए थे। इसमें एक चिकित्सक, फार्मासिस्ट व स्टाफ नर्स की तैनाती की जानी थी। साथ ही इसके साइन बोर्ड भी लगाए जाने थे।
लेकिन, एक वर्ष बाद भी सुविधाएं शुरू नहीं हो सकीं हैं। इससे मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। वर्तमान में ओपीडी समय में अस्पतालों में महज एक काउंटर पर टीकाकरण किया जा रहा है तो वहीं ओपीडी समाप्त होने पर इमरजेंसी में एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाया जा रहा है। इनमें महज सामान्य सुविधाएं ही मिल रहीं हैं। इससे संक्रमण का खतरा बना हुआ है। इसके बाद भी जिम्मेदार सुध नहीं ले रहे हैं।
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एक ही परिसर में दी जाना थीं सुविधाएं
अस्पताल परिसर में मॉडल एंटी रेबीज क्लीनिक का साइन बोर्ड स्थापित होना था। इसमें एक वाशिंग प्वाइंट बनाया जाना था, जहां पर घाव को धुलवाकर साफ किया जा सके। एआरबी व एआरफ लगाने के लिए अलग-अलग स्थानों की व्यवस्था की जानी थी। साथ ही दवा को तय डिग्री सेल्सियस पर रखने के लिए उपकरण उपलब्ध करवाने व प्रशिक्षित कर्मचारी से टीकाकरण कराने का प्रावधान किया गया था। लेकिन अब तक क्लीनिक स्थापित तक नहीं हो सकी है।
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मेडिकल काॅलेज में मॉडल एंटी रैबीज क्लीनिक स्थापित कराई जा रही है। जल्द ही संचालित कर सुविधाएं दी जाएंगी।
- डाॅ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ