मड़ावरा। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने का दावा ब्लॉक मड़ावरा की ग्राम पंचायत सौंरई में फेल हो गया है। ग्राम पंचायत में पेयजल आपूर्ति और स्वच्छता के नाम पर लाखों रुपये का खर्च दिखाया गया है, लेकिन हकीकत में गांव के करीब 50 परिवार महज एक हैंडपंप से ही प्यास बुझा रहे हैं।
गांव में पेयजल आपूर्ति के लिए सालों पहले पाइप लाइन परियोजना का शुभारंभ तत्कालीन सांसद राजेंद्र अग्निहोत्री ने कराया था। ग्रामीण बताते हैं कि गांव में बिछाई गई पाइप लाइन से कुछ समय तक तो पेयजल की आपूर्ति रही, लेकिन बाद में आपूर्ति ठप हो गई। हालात यह हैं कि गांव में बनी पानी की टंकी और नलकूप महज सफेद हाथी साबित हो रहे हैं।
वहीं ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों ने कागजों में हैंडपंप रिबोर के नाम पर 80-80 हजार रुपये खर्च करने का दावा किय है, लेकिन गांव की सहारिया बस्ती के ग्रामीण परिवार काफी दूर से बरिया के हैंडपंप से पानी लेकर आने के लिए मजबूर हैं।
गांव में लगे अन्य हैंडपंपों का हाल भी ठीक नहीं है। कई हैंडपंपों के पास गंदगी और कीचड़ का अंबार लगा हुआ है। वहीं गांव में कोरोना संक्रमण से सुरक्षा के लिए ग्राम पंचायत द्वारा छह हजार रुपये के फेस मास्क वितरित कराने का दावा भी किया गया है। लेकिन इसमें भी झोल नजर आ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत में बड़ा गोलमाल किया गया है। जिसकी जांच की जाए, तो बड़ा खेल सामने आ सकता है।
बस्ती में है पेयजल की किल्लत
हमारी बस्ती के तीस-चालीस परिवार की महिलाओं को पानी लाने काफी दूर जाना पड़ता है। हैंडपंप जब खराब हो जाता है तो और अधिक दूर नदी किनारे स्थित झिरिया (कुएं) से पानी लाना पड़ता है।
- मोरबाई, सहारिया बस्ती।
सालभर से नहीं हुई नालियों की सफाई
हमारी बस्ती में साल भर से नालियों की सफाई नहीं कराई गई। नालियों की गंदगी सड़क पर बह रही है, कीचड़ में पनप रहे मच्छर-मक्खियों के आतंक मोहल्लावासी परेशान हैं।
-जुगल, सहारिया बस्ती।