आल्हा ऊदल की कचहरी देखने पहुंची पुरातत्व विभाग की टीम
ललितपुर। राज्य पुरातत्व विभाग की टीम विंध्यांचल पर्वत श्रृंखला चंडी माता मंदिर परिसर स्थित आल्हा-ऊदल की कचहरी देखने के लिए पहुंची। जहां टीम के अधिकारियों व कर्मचारियों ने पुरा स्थल की फोटोग्राफी लेकर स्थानीय लोगों से इसकी जानकारी ली।
अमर उजाला ने गत 16 जुलाई को पेज नंबर 6 पर खंडहर हो गए किला व आल्हा ऊदल की कचहरी शीर्षक नाम से खबर प्रकाशित की थी। जिसका संज्ञान लेते हुए राज्य पुरातत्व विभाग संरक्षण विभाग की टीम ने उक्त स्थल पर पहुंचकर पुरा स्थल का जायजा लिया और अभिलेखों में दर्ज अन्य स्थानों से मिलान किया। नाराहट क्षेत्र में ग्राम दौलतपुर गांव के नजदीक जंगलों से होते हुए करीब तीन से चार किलोमीटर पहाड़ी पर चंडीमाता मंदिर स्थित है। इस मंदिर के पास ही प्राचीन पत्थरों से निर्मित किला और एक बिखरी पड़ी पुरासंपदा आल्हा-ऊदल की कचहरी है, जिसके बारे में मान्यता है कि यहां कभी आल्हा-ऊदल कचहरी लगाया करते थे और लोगों की समस्याओं का निस्तारण कराते थे। वहीं पास में एक पत्थरों से जो किला है वह भी यहां अपनी नक्काशी के लिए जाना जाता है। ऐसी किंवदंती भी है कि यहां मंदिर में आज भी नवरात्रि के दिनों में आल्हा-ऊदल के घोड़ों की आवाजें सुनाई देती हैं। इस खबर को जब गत दिनों अमर उजाला ने प्रकाशित किया तो राज्य पुरातत्व संरक्षण विभाग झांसी की टीम ने उक्त स्थल पर पहुंचकर यहां की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने स्थानीय लोगों से इस स्थान के बारे में जानकारियां जुटाईं। जिसमें बताया गया कि यहां कई वर्ष पूर्व भारतीय पुरातत्व विभाग का एक बोर्ड लगा हुुआ था, जो अब यहां से निकाल दिया गया है और यहां के लिए गार्ड भी तैनात हैं, जो कभी-कभी यहां आते हैं। टीम की ओर से राज्य पुरातत्व संरक्षण विभाग के रमेश प्रसाद ने बताया कि उक्त प्राप्त जानकारी के अनुुसार यह स्थान भारतीय पुरातत्व विभाग के अंतर्गत आता है, जिसका एक कार्यालय देवगढ़ में भी है।