फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

परिसदीय विद्यालयों की दुर्दशा सुधारने 1.17 करोड़ रुपए का इंतजार

विज्ञापन
विज्ञापन
विद्यालयों के कायाकल्प को 1.17 करोड़ रुपये का इंतजार
विज्ञापन

ललितपुर।
जनपद में संचालित हो रहे परिषदीय विद्यालयों की रंगाई-पुताई व रखरखाव के लिए शासन ने बीते अगस्त माह में 1.17 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति दे दी थी। अभी चार माह से अधिक समय बीतने के बाद भी जनपद को बजट उपलब्ध नहीं हो पाया है। इससे विद्यालयों की दुर्दशा नहीं सुधर पा रही है। वहीं, दूसरी ओर शासन भी बिना बजट उपलब्ध कराए धनराशि की व्यय का ब्योरा मांग रहा है।
जनपद में 1,050 विद्यालय प्राथमिक और 512 विद्यालय उच्च प्राथमिक विद्यालय मिलकार कुल 1,562 परिषदीय विद्यालय संचालित हो रहे है। अधिकतर परिषदीय विद्यालय वर्षों पुराने हैं, जिनकी हालत काफी खराब हो चुकी है। इन परिषदीय विद्यालयों की छोटी-मोटी मरम्मत कार्य और रंगाई-पुताई समेत अन्य व्यवस्थाओं के लिए हर वर्ष शासन द्वारा लाखों रुपये उपलब्ध कराया जाता है। शासन ने वर्ष 2017-18 के वार्षिक बजट में जनपद के परिषदीय विद्यालयों की मरम्मत व रंगाई-पुताई के लिए बीते वित्तीय स्वीकृति देते हुए अगस्त माह में 1.17 करोड़ रुपये जनपद के लिए उपलब्ध भी करा दिए थे। आज चार माह से अधिक समय बीत गया है, लेकिन अभी तक यह धनराशि जनपद के खाते में नहीं पहुंची है। जबकि शासन की मंशा थी कि नवंबर माह तक जनपद के समस्त विद्यालयों में रंगाई-पुताई व मरम्मत आदि का कार्य पूर्ण कर लिया जाए। दिलचस्प बात यह है कि शासन द्वारा जनपद के लिए बजट तो उपलब्ध नहीं करा या गया है, लेकिन शासन ने जिला बेसिक शिक्षा विभाग से रखरखाव मत में व्यय की जाने वाली धनराशि का ब्योरा मांग लिया है। इन धनराशि का उपयोग विद्यालयों के भवनों की दीवारों का पलस्तर सही कराने, रंगाई-पुताई, खिड़की-दरबाजों की मरम्मत और साथ ही हैंडपंप व शौचालयों की मामूली मरम्मत आदि के लिए किया जाएगा। धनराशि को विद्यालय प्रबंध समिति के खातों में भेजा जाता है और समिति के द्वारा ही उक्त धनराशि को व्यय किया जाता है। हर वर्ष रुपए आने के बाद भी परिषदीय विद्यालयों के भवनों की स्थिति काफी खराब है। विद्यालयों की हर वर्ष नियमित रुप से रंगाई-पुताई भी नहीं कराई जाती है और उक्त धनराशि को ठिकाने लगा दिया जाता है।
विज्ञापन


राज पंचायत भी नहीं दे रहा ध्यान
इसके साथ ही राज पंचायत विभाग भी जनपद के विद्यालयों की दुर्दशा को गंभीरता से नहीं ले रहा है। ग्रामीण इलाकों में संचालित परिषदीय विद्यालयों की पेयजल व्यवस्था को स्वच्छ शौचालय उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी शासन ने इस सत्र से राज पंचायत विभाग को सौंप दी है। इसके क्रम में जिला बेसिक शिक्षा विभाग ने ऐसे परिषदीय विद्यालयों की सूची जिला पंचायत राज अधिकारी विभाग को सौंपी है। जहां के हैंडपंप और शौचालय खराब पड़े हुए हैं। इस सूची को दिए हुए चार माह का समय बीत गया है, लेकिन अब तक स्थिति शून्य बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्र के लगभग 255 परिषदीय विद्यालयों के हैंडपंप खराब पढ़े हुए हैं, इनमें करीब 144 हैंडपंप ऐसे हैं, जो री-बोर होने हैं। इसके अलावा 111 हैंडपंप ऐसे हैं, जिनकी मरम्मत होनी है। इसके अलावा विद्यालयों में बच्चों को शौचालय की सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। ग्रामीण इलाकों में संचालित विद्यालयों के लगभग 384 शौचालय ऐसे हैं, जिनपद ताले लटक रहे हैं। गंदगी और शौचालय चौक होने के कारण बालक-बालिकाएं शौचालय का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। इसमें बालक शौचालयों की संख्या 201 और बालिका शौचालयों की संख्या 183 है।
विज्ञापन


अभी नहीं आई धनराशि
विद्यालयों के रखरखाव मत की धनराशि अभी शासन से भेजी नहीं गई है। शासन ने धनराशि व्यय का ब्यौरा मांगा था, जिसका जवाब भेज दिया गया है। जैसे ही धनराशि आती है विद्यालयों की प्रबंध समितियों के खातों में भेज दी जाएगी।
- अंबरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, ललितपुर।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें