ऐसे कैसे सुरक्षित रहेंगी बेटियां, पीड़िता ने की आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग
पसगवां। बीते एक माह में क्षेत्र में हुईं नाबालिग बेटियों से सामूहिक दुष्कर्म की दो घटनाओं ने लोगों को झकझोर दिया है। महिला अपराध को लेकर पसगवां राष्ट्रीय स्तर सुर्खियों में है। इलाके की बेटियां घर से बाहर निकलने से डर रही हैं। अभिभावक चिंतित हैं।
आज से ठीक एक महीना पहले 20 जून को कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में आठ वर्षीय अनुसूचित जाति की किशोरी गांव में बकरी चराने गई थी, जहां खेत में ही उसकी दुष्कर्म कर गला घोटकर हत्या कर दी गई थी। बच्ची का शव देर रात गन्ने के खेत से रक्त रंजित अवस्था में मिला था। पुलिस ने पहले मामले में हत्या की रिपोर्ट दर्ज की थी। लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पुष्टि होने के बाद मामले में दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की धाराएं बढ़ाई गईं थीं। वहीं, घटना का सीएम योगी द्वारा संज्ञान लेनेे के बाद पुलिस ने घटना के छठे दिन मामले का खुलासा कर गांव के ही एक आरोपी युवक को गिरफ्तार किया था, जो घटना वाले दिन खेत में घास काटने गया था। आरोपी ने अकेली घर जा रही बिटिया को दबोचकर घटना को अंजाम दिया था। मामले में बसपा सांसद रामजी गौतम और कांग्रेस की महिला प्रतिनिधिमंडल ने भी पीड़ित परिवार से मिलकर उनके साथ खड़े रहने का भरोसा दिया था।
दरिंदों ने इस घटना से भी सबक नहीं लिया और एक महीने के अंदर 18 जुलाई की रात को फिर एक नाबालिग से दुष्कर्म की घटना को अंजाम दे डाला। कई अभिभावकों ने बताया कि आरोपियों को न तो कानून का भय है और न ही सामाजिक तिरस्कार का। बोले, उनकी बेटियां भय के कारण घर से बाहर नहीं निकल रही हैं। क्षेत्र में कई शोहदे हैं, जो अक्सर गलत नियत से बच्चियों और महिलाओं को देखते हैं। लेकिन लोग उनके उलझने के बजाय बचकर निकल जाते हैं।
पीड़िता को पुलिस ने जिला मुख्यालय जाने को कहा
पीड़िता और उसके पिता ने मांग की कि जिन आरोपियों ने दरिंदगी को अंजाम दिया है, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा होनी चाहिए। पीड़िता के पिता ने बताया कि वह थाने से वापस अपने गांव जा रहे हैं, पुलिस ने उनसे कहा है कि वह कोई नक्शा तैयार कर रहे हैं। उन्हें और उनकी बेटी को जिला मुख्यालय जाना होगा।