धौरहरा/ईसानगर (लखीमपुर खीरी)। धौरहरा वनरेंज में घाघरा नदी किनारे के इलाकों में पिछले तीन महीने से सक्रिय तेंदुए ने एक किशोर को हमला कर घायल कर दिया। गंभीर हालत में किशोर को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया है।
धौरहरा वनरेंज और ईसानगर थाना क्षेत्र के डुंडकी गांव निवासी दुलारे का 14 वर्षीय पुत्र दुर्गेश घाघरा नदी के तटीय इलाके में मवेशी चराने गया था। वहां पहले से मौजूद तेंदुए ने उस पर हमला कर गंभीर रूप से जख्मी कर दिया। दुर्गेश की चीखें सुनकर आसपास के खेतों में काम कर रहे लोगों ने तेंदुए को भगाया और जख्मी दुर्गेश को जिला अस्पताल पहुंचाया। वहां से दुर्गेश को लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया है।
--
तीन महीने में तीन बच्चों की जान ले चुका है तेंदुआ
धौरहरा/ईसानगर। धौरहरा वनरेंज की गनापुर वन बीट में घाघरा नदी के किनारे पिछले तीन महीनों से तेंदुआ सक्रिय है। हिंसक तेंदुआ अब तक तीन बच्चों की जान ले चुका है और कई मवेशियों को अपना निवाला बना चुका है। वहीं साल भर में तेंदुआ ने यहां नौ लोगों पर हमला बोला है लेकिन वन विभाग की टीमें उसे पकड़ने में कामयाब नहीं हो पा रही हैं।
चेतावनी को गंभीरता से नहीं लेते लोग
वन विभाग निरंतर जंगल से सटे इलाके के ग्रामीणों को यह चेतावनी देता रहा है कि बच्चों को अकेला खेतों में न भेजें पर लोगों ने इस पर ज्यादा ध्यान देना मुनासिब नहीं समझा। तेंदुए ने दो माह में तीन बच्चों पर हमला किया है। वन क्षेत्राधिकारी अनिल शाह ने बताया कि वन क्षेत्र के पास रहने वाले लोगों को अपनी जीवनशैली बदलनी होगी। लोग समूह में खेतों में जाएं और 16 साल तक के बच्चों को खेतों में बिल्कुल न भेजें।
लगाए गए चार पिंजड़े और 12 कैमरे
तराई क्षेत्र में तेंदुए के बढ़ते हमलों के चलते वन विभाग ने बेलागढ़ी क्षेत्र में चार पिंजड़े और 12 नाइट विजन कैमरे भी लगाए हैं। इसके अलावा वन विभाग की टीम, दुधवा टाइगर रिजर्व की टीम के साथ मचान वाली गाड़ियों से तेंदुए की टोह ले रही है लेकिन तेंदुआ वन विभाग की पकड़ में नहीं आ रहा है। हालांकि वन विभाग ने एक माह पहले मादा तेंदुए को यहां से पकड़ा था, जिसे दुधवा के जंगल में छोड़ दिया गया।
-
तेंदुए के हमले की जानकारी मिली है। वन विभाग की टीमें गनापुर वन बीट में मुस्तैद हैं। उम्मीद है कि जल्दी ही हिंसक तेंदुआ कैद में होगा। तब तक ग्रामीण खेत-खलिहान अकेले जाने से बचें।
- अनिल कुमार पटेल, डीएफओ नार्थ