बांकेगंज। सुबह-शाम घने कोहरे की वजह से कुछ मीटर की दूरी की चीजों का भी दिखना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में बाघ हमलों का खतरा बढ़ गया है। वन विभाग ने इस स्थिति को गंभीरता से लिया है और सतर्कता बढ़ा दी है। जन जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।
सर्दियों में बड़ी घास में रहने के आदी बाघ गन्ने के खेतों को अपना ठिकाना बनाकर वहां बसेरा बना लेते हैं। जिससे आबादी से सटे गन्ने के खेतों में बाघ और तेंदुए का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। घने कोहरे में तो हालात और भी बुरे हो जाते है। कोहरे की वजह से पास में मौजूद बाघ और तेंदुओं का आभास तक नहीं होता। ऐसे में कोहरे के दौरान बाघ हमलों के बढ़ते खतरे को भांपते हुए दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने एक व्यापक जन जागरूकता अभियान शुरू किया है। इसके तहत दुधवा टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक/ फील्ड निदेशक संजय पाठक की ओर से जंगल से सटे गांव में रहने वाले लोगों और किसानों के लिए एक एडवाइजरी जारी की गई है। इस एडवाइजरी में ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि वे गन्ना कटाई करते समय लगातार शोर मचाते रहें या तेज आवाज में गाने बजाएं। गन्ना काटने से पहले हांका लगाएं, खेतों में अकेले जाने के बजाए समूह में जाएं। कहीं पर बाघ होने का आभास हो तो तुरंत संबधित क्षेत्रीय वनाधिकारियों को सूचना दें। ऐसे में जन जागरूकता अभियान के तहत वन विभाग की टीमें जंगल से सटे गांवों में जाकर बाघ हमलों से बचाव की जानकारियां दे रही है।
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सर्दियों के मौसम में जंगल से सटे इलाके में विशेषकर गन्ने के खेतों में बाघों के आने से उनके हमलों का खतरा बढ़ जाता है, खासकर कोहरे के दौरान यह खतरा दो गुना बढ़ जाता है। इसके चलते बचाव के लिए वन विभाग जन जागरूकता अभियान चला रहा है। जिसमें ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
- डॉ अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन
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थारू गांवों में बाघों को लेकर जन जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन
चंदनचौकी। दुधवा नेशनल पार्क के उत्तर सोनारीपुर रेंज चंदनचौकी के ग्राम रामगढ़ और मौरा में बाघ सुरक्षा माह को लेकर जन जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें बाघों के बारे में जानकारी देने के साथ ही वन मित्र भी नियुक्त किए गए।
दुधवा टाइगर रिजर्व के उत्तर सोनारीपुर रेंज चंदनचौकी के ग्राम रामगढ़ और मौरा में आयोजित गोष्ठी में रेंजर प्रदीप कुमार वर्मा ने कहा कि प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए वन और वन्य जीवों का संरक्षण जरूरी है। यही नहीं ग्रामीणों को ताकीद की गई कि वे वन क्षेत्रों में शौच को न जाएं और ना ही खुले में पालतू पशुओं को बांधे। गोष्ठी में बच्चों को वन के किनारे न जाने और जंगलों में समूह बनाकर ही जाने की हिदायत दी गई। ग्रामीणों को बाघ मिलने पर उससे कैसे बचा जाए इसके बारे में भी कई टिप्स दिए गए। इस मौके पर वन मित्र की तैनाती भी की गई। संवाद
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वन्यजीवों को बचाना हम सबका दायित्व
ममरी। बाघ संरक्षण माह के तहत वन रेंज मोहम्मदी महेशपुर के वन कर्मियों ने गुरुवार को हैदराबाद थाना क्षेत्र के बोझबा प्राथमिक विद्यालय में गोष्ठी की, जिसमें बाघ से बचाव और संरक्षण के उपाय बताए गए।
खुशीराम की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी में रेंजर मोबिन आरिफ ने बताया कि वन्यजीवों से हमारी फसलों की पशुओं से सुरक्षा होती है, जिन्हें बचाना हम सभी का कर्तव्य है। वन्य जीवों के संरक्षण पर सरकार भी विशेष बल दे रही है। बताया कि बाघ, तेंदुए इंसान पर हमला तभी करते हैं जब वह खुद को घिरा और असुरक्षित महसूस करते हैं। फॉरेस्टर जगदीश वर्मा बताया कि सीजन में बाघ तेंदुए शिकार की तलाश में जंगल से बाहर गन्ने के खेतों में आ जाते हैं, ऐसे में सभी को सतर्क रहने की जरूरत है। गन्ने की कटाई, छिलाई समूह में खड़े होकर करें। बाघ की आहट मिलने पर समूह में हाका लगाएं और सूचना वन चौकी पर दें। बच्चों को अकेले बाजार, स्कूल, खेल मैदान न जाने दें। संवाद