क्रय केंद्रों पर सन्नाटा, फिर भी बदल रहे आंकड़े
दो माह में सिर्फ 10 फीसदी धान की हुई खरीद
सरकारी धान खरीद की जिले में इस वर्ष सबसे खराब हालत रही है। लक्ष्य एक लाख 64 हजार 240 मीट्रिक टन के सापेक्ष दो माह (अक्तूबर-नवंबर) में 17 हजार 832 मीट्रिक टन धान खरीदा गया है, जो महज 10 फीसदी है। खास बात यह है कि क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा है, लेकिन धान खरीद के आंकड़ों में धीरे-धीरे इजाफा हो रहा है। जो इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि आम किसान अपना धान इन क्रय केंद्रों पर नहीं बेच सके, लेकिन वीआईपी और रसूखदार लोगों का ही धान खरीदा जा रहा है।
बता दें कि धान खरीद के लिए 97 क्रय केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें से अधिकतर केंद्रों पर धान खरीद की शुरुआत नहीं हो सकी है। सूत्रों की माने तो किसानों के नाम पर बिचौलियों के माध्यम से धान खरीदा जा रहा है। हालांकि अधिकारी इससे इंकार कर रहे हैं। अब नोटबंदी के कारण का हवाला दिया जा रहा है, लेकिन आठ नवंबर से पहले तक भी सिर्फ पांच फीसदी धान खरीद हुई थी। 25 हजार लक्ष्य वाली यूपी कोआपरेटिव यूनियन ने 122 मीट्रिक टन धान खरीदने के बाद से खरीद बंद कर रखी है। 40 हजार लक्ष्य वाले खाद्य विभाग ने 5153 मीट्रिक टन, 39640 लक्ष्य वाली एजेंसी पीसीएफ ने 2019 मीट्रिक टन, 4500 लक्ष्य वाली एग्रो ने 126 मीट्रिक टन, 12 हजार लक्ष्य वाली एसएफसी ने 1592 मीट्रिक टन, 16 हजार लक्ष्य वाली कर्मचारी कल्याण निगम ने 593 मीट्रिक टन, सात हजार लक्ष्य वाली एनसीसीएफ ने 2826 मीट्रिक टन धान खरीदा है। 6500 लक्ष्य वाली नैफेड ने अब तक क्रय केंद्र ही नहीं खोले हैं। केंद्रीय पूल की 13600 लक्ष्य वाली एफसीआई ने 5399 मीट्रिक टन धान खरीदा है। जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी कौशल देव ने बताया कि कुछ एजेंसियों ने अपने निजी कारणों से खरीद में हीला-हवाली की है, जिसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। अब तक 2066 किसानों से धान खरीद की गई है।