भागदौड़ भरी जिंदगी में हेडफोन, नेकबैंड, ईयरबड्स आदि का चलन काफी बढ़ा है। घर, कार्यालय हर जगह लोग कानों में ईयरफोन लगाए दिखाई देते हैं। कोई फिल्म देखता तो कोई गाने सुनता या फिर घंटों बातें करता दिखाई देता है। इसका इस्तेमाल बढ़ने से श्रवण ह्रास और टिनिटस की एक मुख्य वजह बन रही है। शासन ने इस पर चिंता व्यक्त की है। प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी डीएम, कमिश्नर को पत्र लिखकर श्रवण ह्रास और टिनिटस को रोकने के निर्देश दिए हैं।
केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को ईयरफोन, हेडफोन के उपयोग से होने वाली श्रवण ह्रास के संबंध में यूपी समेत सभी राज्यों को एडवाइजरी जारी की है। कहा गया कि वायर्ड या ब्लूटूथ ईयरप्लग, हेडफोन के अनावश्यक उपयोग को रोकें। इन चीजों से सुनने की क्षमता में कमी या अस्थायी तौर पर सुनने की क्षमता खत्म हो जाती है। आवश्यकता पड़ने पर 50 डेसिबल वॉल्यूम सहित ईयरफोन जैसे व्यक्तिगत उपकरणों के प्रयोग के संबंध में जागरूक करें।
लखीमपुर खीरी के एडीएम संजय सिंह ने कहा कि चिकित्सीय परीक्षण के आधार पर श्रवण ह्रास होता है। इसके दुष्प्रभावों के बारे में लोगों को बताया जा रहा है। समाज के जागरूक लोगों से अपील की गई कि कि वह बच्चों व अन्य लोगों को ईयरफोन की लत से बचाए, उनको जागरूक करें, ताकि लोगों में श्रवण ह्रास की दिक्कतें न हो।
डॉक्टर का सलाह
मेडिकल कॉलेज के ईएनटी सर्जन डॉक्टर मनोज शर्मा ने बताया कि प्रतिदिन ओपीडी में 120 से 140 मरीज आते हैं। इसमें एक से दो मरीज ऐसे आते हैं, जिनको ईयरफोन से कम सुनाई की समस्या होती है। यह एक गंभीर समस्या है। अगर समय रहते इलाज शुरू हो जाए तो पूरी तरह ठीक हो सकते हैं, नहीं तो आगे स्थिति गंभीर हो सकती है। मेडिकल कॉलेज में इलाज की पूरी सुविधाएं हैं। कहा, किसी को अचानक सुनाई देना बंद हो जाता है, तो कान में पर्दे के अंदर माइक्रोस्कोप से इंजेक्शन लगाते हैं, जिससे उसके सुनने की क्षमता वापस आती है।
इन बातों को रखें ध्यान
- कम आवाज में ईयरफोन का इस्तेमाल करें।
- कोशिश करें एक समय में एक ही कान में ईयरफोन लगाए।
- आधे-आधे घंटे बाद ईयरफोन को कान से निकालते रहे।
- ब्रांडेंड हेडफोन का ही इस्तेमाल करें।
- अगर किसी प्रकार की कोई दिक्कत है तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें।
- बच्चों को ईयरफोन के इस्तेमाल करने से रोकें।
श्रवण ह्रास के साथ ये भी होती समस्याएं
- मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है।
- कान के अंदर ब्लड फ्लो में बदलाव हो सकता है।
- कानों में इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
- कान में दर्द और सूजन हो जाती है।