पलिया क्षेत्र के बनगवां गांव में एक ग्रामीण के घर में दो कोबरा सांप देखे जाने से दहशत फैल गई। सूचना पर दुधवा टाइगर कंजर्वेशन फाउंडेशन की मोटिवेटर नाजरुन निशा पहुंचीं। उन्होंने सावधानी बरते हुए दोनों सांप को पकड़ा। इसके बाद जंगल में छोड़ दिया।
लखीमपुर खीरी के दुधवा टाइगर रिजर्व के अंर्तगत संचालित दुधवा टाइगर कंजर्वेशन फाउंडेशन में कार्यरत मोटिवेटर नाजरुन निशा ने एक ही दिन में दो कोबरा सांप को रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा। बुधवार को वन विभाग को सूचना मिली कि पलिया क्षेत्र के बनगवां गांव के एक घर में सांप है। सूचना मिलने के बाद जब नाजरुन निशा मौके पर पहुंचीं तो वहां पता चला कि घर में दो जहरीले सांप हैं। इन सांपों की पहचान स्पेक्टिकल कोबरा के रूप में की गई। निशा ने दोनों सर्पों का रेस्क्यू प्रारंभ किया। दोनों सांप का रेस्क्यू करते उनको सुरक्षित दुधवा टाइगर रिजर्व प्रभाग, पलिया-खीरी के जंगल में छोड़ दिया गया।
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नाजरुन निशा ने बताया कि भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला यह एक विषैला सांप है, जिसकी पहचान इसके फन के पीछे बने चश्मे जैसे निशान से होती है, जो अक्सर इसकी पहचान का मुख्य बिंदु होता है। हालांकि, इसके रंग और पैटर्न में भिन्नता हो सकती है। यह भारत में सांप के डसने से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण है। यह मुख्य रूप से चूहों को खाता है, इसीलिए यह मानव बस्तियों के आसपास अक्सर पाया जाता है। हालांकि इसका ज़हर रसेल वाइपर जितना घातक नहीं है। इसके ज़हर में न्यूरोटॉक्सिक विष होता है, जो तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचाता है और लकवा, सांस लेने में कठिनाई और मृत्यु का कारण बन सकता है।