लखीमपुर खीरी। शासन ने भले ही जनपद को मेडिकल कॉलेज अस्पताल की सौगात दे दी है, लेकिन इसका लाभ जिले वासियों को नए साल पर भी नहीं मिल पाएगा। अभी तक मेडिकल अस्पताल का महत्वपूर्ण भाग डी-ब्लॉक ही नहीं बना। जानकारों का कहना है कि जब भी निर्माण शुरू होगा, उसे पूरा होने में करीब 10-11 महीने का वक्त लगेगा। निर्माण कब से होगा, कोई स्पष्ट ही नहीं कर पा रहा है।
देवकली में मेडिकल कॉलेज काफी पहले शुरू हो चुका। वहां एमबीबीएस की पढ़ाई चल रही है लेकिन पुराने जिला अस्पताल परिसर में मेडिकल कॉलेज का अस्पताल अब भी मानकों में अधूरा है। मेडिकल अस्पताल चार हिस्सों ए, बी, सी व डी ब्लॉक में होता है। तीन ब्लॉक तो काफी पहले बन गए, लेकिन डी-ब्लॉक अब तक नहीं बना। विभागीय सूत्रों ने बताया कि निर्माण इकाई को डी-ब्लॉक के लिए जमीन काफी देरी से मिली। जब मिली तो निर्माण लागत बढ़ गई। इकाई ने और बजट की मांगा, लेकिन बजट नहीं मिला। यही वजह है कि डी-ब्लॉक का काम अधर में है।
400 बेड का है मेडिकल कॉलेज अस्पताल
शहर में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज अस्पताल 400 बेड का प्रस्तावित है। इसमें 350 बेड मुख्य अस्पताल, जबकि 50 बेड महिला अस्पताल के होंगे। मेडिकल अस्पताल के पास ही जिला महिला अस्पताल परिसर में डॉक्टरों के आवास बनाए जा रहे हैं, जिसका निर्माण पूरा हो चुका और कुछ डॉक्टर उसमें रहने भी लगे हैं। मेडिकल अस्पताल का निर्माण 261 करोड़ रुपये में हो रहा है।
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अभी विद्युत कनेक्शन भी नहीं
-मेडिकल कॉलेज अस्पताल में तीन ब्लॉक बन चुके हैं, जहां अभी तक विद्युत कनेक्शन भी नहीं हो सका। मेडिकल अस्पताल में विद्युत कनेक्शन के लिए 5.30 करोड़ की जरूरत, जिसमें विद्युत निगम को दो करोड़ दिया जा चुका है, शेष दिया जाना है। इसके लिए मेडिकल कॉलेज प्राचार्य ने पत्राचार किया है।
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वर्जन
मेडिकल कॉलेज अस्पताल का अभी डी-ब्लाॅक ही नहीं बना। बिना डी-ब्लाॅक इसका संचालन संभव नहीं है। जबकि डी-ब्लाॅक सबसे अहम है। इसमें इमरजेंसी, ओपीडी, सर्जरी, लांड्री, किचन, ब्लडबैंक आदि काफी कुछ होता है।
-डॉ. वाणी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, लखीमपुर