सिकंद्राबाद। आठ साल पहले तक कस्ता विधानसभा क्षेत्र के सेहरुआ गांव की महिलाएं मतदान करने नहीं निकलती थीं। हालांकि प्रशासन की टीम हर चुनाव में प्रेरित करती थी। 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने अपने लोकतांत्रिक अधिकार का महत्व समझा। फिर तो ऐसा बदलाव आया कि न केवल वोट डाला बल्कि पुरुषों से भी आगे निकल गईं। वस्तुत: यह वह गांव है, जहां आजादी के बाद और 2014 से पहले किसी महिला ने कभी मतदान नहीं किया था। वही अब जागरूकता की मिसाल बन गई हैं।
कस्ता विधानसभा क्षेत्र का सेहरुआ गांव 2008 में हुए परिसीमन से पहले हैदराबाद विधानसभा क्षेत्र में आता था। यह मुस्लिम बहुल गांव है। आबादी में करीब 80 फीसदी मुस्लिम व 20 फीसदी में अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग के लोग शामिल हैं। साक्षरता में भी यह गांव पहले काफी पिछड़ा था। अधिकांश लोग सब्जी उगाते हैं। गरीबी और बेरोजगारी भी यहां काफी थी। अब न केवल लोगों के जीवनस्तर में सुधार आ रहा है बल्कि लोग जागरूक भी हो रहे हैं।
दरअसल, जागरूकता और साक्षरता की कमी व पर्दा प्रथा की वजह से यहां की महिलाएं आठ साल पहले तक मतदान से दूर ही रहती थीं। यहां तक कि गांव मेंप्रधान का पद महिला के लिए आरक्षित हुआ, तब भी महिलाओं ने वोट नहीं डाले। चाहे लोकसभा का चुनाव हो या विधानसभा या फिर पंचायत चुनाव। किसी भी चुनाव में महिलाओं ने मतदान नहीं किया। महिलाओं के मतदान के लिए प्रशासनिक स्तर से बहुतेरी कोशिशें भी हुईं। लेकिन, सारे प्रयास बेकार गए। महिलाओं को वोट डालने के लिए मनाया नहीं जा सका।
2014 के लोकसभा चुनाव में चले मतदाता जागरूकता अभियान का असर हुआ। तब पहली बार करीब 70 फीसदी से अधिक महिलाओं ने वोट डाले थे। इस चुनाव में गांव के जागरूक और पढ़े-लिखे युवाओं ने भी बड़ा सहयोग किया। इन युवाओं ने पहले अपने घर की महिलाओं के वोट डलवाए। फिर घर-घर जाकर महिलाओं को वोट डालने के लिए प्रेरित किया। इसका असर यह हुआ कि 2017 के विधानसभा चुनाव में करीब 60 फीसदी मतदान हुआ था। इसमें पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं ने अधिक मतदान किया था। वहीं, 2021 के पंचायत चुनावों में करीब 90 फीसदी महिलाओं ने वोट डाले थे। पुरुष इस चुनाव में भी महिलाओं से पीछे रहे।
इस बार विधानसभा चुनाव में सेहरुआ के मतदाताओं की कुल संख्या 1451 है। इसमें 786 पुरुष और 665 महिलाएं हैं। इस बार भी महिलाएं मतदान के प्रति काफी जागरूक दिख रहीं हैं। बीएलओ फुरकान ने उम्मीद जताई कि इस बार भी सेहरुआ की महिलाएं बढ़-चढ़कर मतदान करेंगी और रिकार्ड बनाएंगी।
प्रधानी की महिला प्रत्याशी, फिर भी नहीं डाले वोट सबसे रोचक तथ्य यह है कि वर्ष 1995 में हुए पंचायत चुनाव में सेहरुआ ग्राम पंचायत का प्रधान पद महिला के लिए आरक्षित था। इस चुनाव में दो महिला प्रत्याशी थीं। इस चुनाव में केवल इन्हीं दो महिला प्रत्याशियों ने अपने वोट डाले थे। इनके अलावा किसी भी महिला ने वोट नहीं डाला था। (संवाद)
मुझे पता चला है कि आठ साल पहले तक सेहरुआ गांव की महिलाएं मतदान नहीं करतीं थीं, लेकिन पिछले कुछ चुनावों से वे मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। इस बार 90 प्रतिशत मतदान का लक्ष्य पाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसका असर सेहरुआ गांव में भी होगा। उम्मीद है कि सेहरुआ गांव में भी महिला और पुरुष मिलकर मतदान 90 फीसदी तक करेंगे। उन्हें प्रेरित किया जा रहा है।
-विधेश कुमार, एसडीएम मितौली