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Lakhimpur Kheri News: बाघ-तेंदुओं को इंसानी खून का चस्का, फिर भी छोड़ रहे आजाद

Sun, 08 Mar 2026 11:32 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
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पलियाकलां। जिले में पिछले डेढ़ महीने से बाघ और तेंदुओं की दहशत चरम पर है। स्थिति यह है कि मात्र 45 दिनों के भीतर इन हिंसक वन्यजीवों ने आधा दर्जन लोगों को मौत के घाट उतार दिया है, जबकि एक दर्जन से अधिक लोग घायल होकर अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
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वन विभाग डेढ़ महीने में जिले भर में पांच तेंदुओं और एक बाघ का रेस्क्यू कर चुका है। इसमें एक तेंदुए को रेडियो कॉलर लगाकर कतर्नियाघाट छोड़ा गया। शेष चार तेंदुए और एक बाघ को जंगल में आजाद कर दिया गया है। इसमें एक तेंदुए को रेडियो कॉलर लगाया गया है। बाकी चार तेंदुओं को कतर्नियाघाट और बाघ को दुधवा के खुले जंगल में छोड़ दिया गया।
जानकारों का कहना है कि जब कोई वन्यजीव इंसानी मांस का स्वाद चख लेता है तो उसकी प्राकृतिक शिकार की प्रवृत्ति बदल जाती है। ऐसे आदमखोर प्रवृत्त वाले जीवों को बिना ट्रैकिंग डिवाइस (रेडियो कॉलर) के छोड़ना अंधेरे में तीर चलाने जैसा है। विभाग के पास अब ऐसा कोई जरिया नहीं है जिससे यह पता चल सके कि ये हिंसक जीव वापस आबादी की ओर बढ़ रहे हैं या नहीं। संपूर्णानगर के चंद्रनगर में 15 फरवरी को एक बाघ पकड़ा, जिसे दुधवा में छोड़ा गया।
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पांच मार्च को उसी इलाके के पास फिर से एक व्यक्ति को बाघ ने मार डाला। चर्चा यह भी है कि दुधवा मार्ग पर एक बाघ ने चलती कार पर हमला किया, जो सामान्य व्यवहार नहीं है। आमतौर पर दुधवा के बाघ जिप्सियों और पर्यटकों के अभ्यस्थ होते हैं और हमला नहीं करते।
कार पर झपट्टा मारना इस बात का संकेत है कि वह वही हिंसक बाघ हो सकता है जिसे पकड़ा गया था। रेडियो कॉलर न होने के कारण वन विभाग इन चर्चाओं को झुठलाने की स्थिति में नहीं है। लोगों का कहना है कि जो वन्यजीव आदमखोर घोषित हो जाते हैं या इंसानी आबादी के लिए स्थायी खतरा बन जाते हैं, उन्हें ताउम्र चिड़ियाघर में रखा जाना चाहिए। ग्रा
मीणों में चर्चा है कि विभाग अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के लिए इन हिंसक जीवों को एक क्षेत्र से पकड़कर दूसरे वन क्षेत्र के पास छोड़ रहा है। इससे केवल खौफ का पता बदल रहा है। हालांकि विभाग एनटीसीए की गाइडलाइन पर चलता है। हर किसी बाघ और तेंदुए को सीधे आदमखोर नहीं माना जा सकता उसका परीक्षण होता है और परिस्थितियों को भी जांचा जाता है। उसी के तहत कार्रवाई की जाती है।
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