रोशननगर (लखीमपुर खीरी)। महेशपुर वन रेंज की देवीपुर बीट के अंतर्गत ग्राम पंचायत रामपुर डाटपुर के मजरा दूलीपुर के निकट कोठी के पीछे गन्ने के खेत में बाघ ने एक बैल मार डाला, इस घटना से लोगों में दहशत है।
ग्राम दूलीपुर में बब्बू के गन्ने के खेत में लावारिस घूम रहे बैल को बाघ ने मार डाला। मंगलवार सुबह जब लोग खेतों में गए तो बैल का अधखाया शव और खेतों में बने पगचिह्न देखकर उनमें दहशत फैल गई। ग्रामीणों को शक है कि बाघ गन्ने में ही छिपा बैठा है। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंचे वन रेंज के दो जवानों और विभागीय कर्मी जगदीश प्रसाद वर्मा, अजीत सिंह आदि ने बाघ के हमले, पगचिह्न मिलने की पुष्टि की है। वनकर्मियों ने ग्रामीणों को अकेले खेतो में न जाने, समूह बनाकर हल्ला मचाते हुए जाने की सलाह दी है।
तीन शिकारियों को पकड़ा, हिदायत देकर छोड़ा गया
संपूर्णानगर। वन रेंज के गांधीनगर जंगल के किनारे नदी में मछली का शिकार कर रहे तीन लोगों को वन विभाग की टीम ने पकड़ लिया लेकिन बाद में उन्हें हिदायत देकर छोड़ दिया। यह जानकारी हजारा क्षेत्र के डिप्टी रेंजर राधेश्याम ने दी। वहीं रेंजर आरके रौतेला ने बताया कि मछली शिकार की सूचना पर तीनों को लाया गया था पर बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। संवाद
मानूसन पेट्रोलिंग में जंगल पर रखी जा रही है पैनी नजर
पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क सैलानियों के लिए 15 जून को बंद हो जाता है तो 15 नवंबर को इसे फिर खोला जाता है। इस बीच जंगल के अंदर मानसून पेट्रोलिंग के जरिए नजर रखी जाती है।
बारिश के दौरान दुधवा नेशनल पार्क में जंगल की सुरक्षा अहम रहती है क्योंकि इस दौरान ही शिकारी सबसे ज्यादा सक्रिय रहते हैं और अवैध गतिविधियों को अंजाम देते हैं। ऐसे में जंगल की सुरक्षा को लेकर मानसून पेट्रोलिंग की जाती है। जिसके जरिए जंगली इलाकों में गश्त करने के साथ ही स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के जवान भी मुस्तैदी से सुरक्षा व्यवस्था देखते हैं। इन समय सुहेली नदी में पानी बढ़ जाने के बाद जंगल के कुछ इलाकों में भी पानी भर गया है। ऐसे में हाथियों से जंगल की पेट्रोलिंग की जा रही है। अधिकारी भी लगातार निगरानी कर रहे हैं और कर्मचारियों के साथ खुद भी पेट्रोलिंग का हिस्सा बन रहे हैं। डीडी मनोज सोनकर भी लगातार पेट्रोलिंग कर रहे हैं। डीडी मनोज सोनकर ने बताया कि दुधवा के कच्चे वनमार्ग बारिश के दौरान खराब हो जाते हैं ऐसे में अराजक तत्व इसका फायदा उठाकर जंगल में प्रवेश करते हैं और वन तथा वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाते हैं। इन सब गतिविधियों की रोकथाम के लिए लगातार गश्त की जा रही है। कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है वह लगातार जंगली इलाकों में बने रहें। एप के जरिए भी जंगल की निगरानी करते रहें ताकि अराजक तत्वों पर नकेल कसी जा सके। संवाद