इफ्को किसान सेवा केंद्र पर खाद लेने के लिए लगी लाइन
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लखीमपुर खीरी। यूरिया की किल्लत जमाखोरों ने बढ़ा दी है। नियम-कायदे ताक पर रखकर बड़े किसानों को भारी मात्रा में यूरिया दी जा रही है, जिससे छोटे किसान लंबी लाइन में खड़े मुंह ताकते रह जाते हैं। गुरुवार को राजापुर मंडी स्थित इफको किसान सेवा केंद्र पर ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां एक तरफ किसान लंबी लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते दिखे। तो दूसरी तरफ बैकडोर से बड़े और रसूखदार किसान ट्रैक्टर और ऑटो रिक्शा में दर्जनों बोरी यूरिया भरकर ले गए। कुछ घंटो में 1200 बोरी रेवड़ी की तरह बंट गईं। स्टॉक निल होने से लाइन में लगे किसान मायूस होकर लौट गए।
गुरुवार को राजापुर मंडी स्थित इफको किसान सेवा केंद्र पर कई दिनों बाद दो ट्रकों से 1200 बोरी यूरिया पहुंची। इसकी जानकारी लगते ही यूरिया लेने के लिए किसानों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। ट्रक से यूरिया गोदाम नहीं पहुंच पाई, बल्कि सीधे ट्रक से ही बांटी गई। मंडी में अनाज बेचने आए किसान भी यूरिया लेने इफको सेवा केंद्र पहुंच गए। इससे लाइन में लगे किसानों में अफरा-तफरी रही, क्योंकि दूसरी तरह लोग ट्रैक्टर-टेंपो और ई-रिक्शा में खाद भरकर ले जा रहे थे। केंद्र पर पॉस मशीन के जरिए अंगूठा लगवाकर किसानों को खाद दी गई, लेकिन पॉस मशीन से किसानों की खतौनी लिंक न होने के कारण छोटे और बड़े किसानों में फर्क जानना मुश्किल है। हालांकि इफको के जिला प्रबंधक एससी मिश्रा ने बताया कि बड़े किसानों से खतौनी की प्रति लेकर अधिकतम 10 बोरी यूरिया दी जा रही है। इसके अलावा सामान्य तौर पर सभी किसानों को दो से पांच बोरी तक यूरिया उनकी डिमांड के अनुसार उपलब्ध कराई जा रही है।
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इफको के ई बाजार में कई महीने से यूरिया नहीं
जनपद में बड़े पैमाने पर सहकारी समितियां ही खाद की किसानों तक आपूर्ति करती हैं। फिर भी इफको ने तीन ई-बाजार खोले हैं, जो महेवागंज, पिपरिया धनी और सिसैसा चौराहे पर खुले हैं। इनमें खरीफ सीजन में अब तक यूरिया की सप्लाई नहीं पहुंच पाई है, जिससे किसानों के लिए ई-बाजार सफेद हाथी बने हैं।
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कुल 150 सहकारी संस्थाओं की समितियां किसानों को खाद वितरण कर रही हैैं, जिनमें उपलब्धता के अनुसार खाद किसानों को दी जा रही है। सचिवों को टोकन जारी करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे किसानों को लाइन में न लगना पड़े। एक किसान को अधिकतम पांच बोरी खाद देने के निर्देश दिए हैं। यदि इससे ज्यादा खाद का वितरण कराने की जानकारी मिलती है, तो उसकी जांच कराई जाएगी।
-रत्नाकर सिंह, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता