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Lakhimpur Kheri News: त्वचा रोगियों के लिए अस्पताल में कई दवाएं नहीं

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जिला अस्पताल में त्वचा रोग कक्ष के बाहर लगी मरीजों की लाइन। संवाद
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लखीमपुर खीरी। मौसम में बदलाव के साथ ही त्वचा रोगियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। जिला अस्पताल में त्वचा से संबंधित रोग के मरीज इलाज के लिए लगातार पहुंच रहे हैं। हालांकि जिला अस्पताल में त्वचा रोगियों के लिए कई जरूरी दवाएं नहीं हैं। अधिकांश महंगी दवाइयां उन्हें बाहर से खरीदनी पड़ रहीं हैं। इससे मरीजों की जेब पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
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जिला अस्पताल की त्वचा रोग की यूनिट में प्रतिदिन करीब 150-200 मरीजों की ओपीडी हो रही है। इसमें तकरीबन 10 प्रतिशत मरीज दाद, खाज, खुजली, एक्जिमा सहित अन्य बीमारियों से ग्रसित आ रहे हैं। यहां आने वाले मरीजों को डॉक्टर सिर्फ परामर्श दे रहे हैं, लेकिन इलाज के लिए मेथोट्रेक्सेट 10 एमजी, कैलामाइन, टोफैसिटिनिब जेल, टोफैसिटिनिब 5 एमजी व क्लोबेटासोल जैसी जरूरी दवाएं स्टोर में नहीं मिल पा रहीं हैं।
दवाओं की अनुपलब्धता के कारण मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर की ओर रुख करना पड़ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों के लिए यह स्थिति और भी तकलीफदेह हो गई है।
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शहर के हाथीपुर निवासी एक मरीज ने बताया कि दाद की दवा लेने आया हूं। डॉक्टर को दिखाने के बाद अस्पताल में दवा मिली ही नहीं। अस्पताल के औषधि कक्ष में बताया गया कि अस्पताल के बाहर से दवा ले लो। जबकि यह दवाएं काफी महंगी हैं।

यह है दवाओं की अनुमानित कीमत
मेथोट्रेक्सेट 10 एमजी :: 450-500
कैलामाइन :: 180-250
टोफैसिटिनिब जेल :: 150-200
टोफैसिटिनिब 5 एमजी :: 140-200
क्लोबेटासोल :: 200-250

बरसात के मौसम में बढ़ने वाले रोग

रोग का नाम
लक्षण
सावधानी
खाज-खुजली :
त्वचा पर लाल चकत्ते, तेज खुजली
: साफ-सफाई का ध्यान रखें, गीले कपड़े न पहनें।
दाद
: जलन, खुजली
: तौलिया, कपड़े साझा न करें।
एक्जिमा
: त्वचा पर सूखापन, फटने की स्थिति : मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें, स्क्रैच न करें।
फंगल इन्फेक्शन : बदबूदार घाव, त्वचा पर सफेद निशान
: शरीर को सूखा रखें, ढीले कपड़े पहनें।

कारपोरेशन से जो दवाएं मिल रही हैं, वह सभी जरूरी दवाएं अस्पताल में उपलब्ध हैं। अगर किसी चिकित्सक को लग रहा है कि किसी दवा की कमी है और वह लिखित जानकारी देते हैं तो वह दवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। - डॉ. वाणी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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