बेसिक शिक्षा विभाग के अंदर फैले मकड़जाल के सहारे की जा रहीं गड़बड़ियों का एक और मामला सामने आया है। फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के सहारे नौकरी हासिल करने में दोषी पाए जाने पर 2004 में बर्खास्त की गई शिक्षिका को नवंबर 2014 में बहाल करते हुए एक विद्यालय में तैनाती कर दी गई। इस मामले को एक व्यक्ति ने चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की है, जिस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने डीएम, बीएसए, वित्त एवं लेखाधिकारी और बहाल हुई शिक्षिका से 12 मई 2015 तक जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग में मृतक आश्रित कोटे के अंतर्गत दोहरी नियुक्तियां कर दी गई थीं। इसके अलावा 2014 में मृतक आश्रित कोटे से एक फर्जी नियुक्ति की गई, जिसकी जांच चल रही है। अब मामला बर्र्खास्तगी के बाद बहाली का सामने आया है। खीरी टाउन के मोहल्ला बुखारी टोला निवासी शमा बेगम ने 13 जुलाई 1987 को शिक्षा विभाग में मृतक आश्रित कोटे में शिक्षक पद पर नियुक्ति हासिल की थी। कन्या विद्यालय मैैलानी में कार्यरत हसमत जहां की मृत्यु के बाद उनके कोटे से यह नियुक्ति की गई थी, जो लखनऊ की निवासी थीं। इस मामले में तत्कालीन बीएसए राजेश वर्र्मा ने जांच कराई थी, जिसमें शमा बेगम के दस्तावेज पूर्णत: कूटरचित और फर्जी पाए गए थे। लिहाजा बीएसए ने 2004 में शिक्षिका शमा बेगम को बर्खास्त कर दिया था।
बीएसए डॉ. ओपी राय ने बताया कि इस मामले में अभी तक कोर्ट के आदेशानुसार कार्रवाई की गई है। पूर्व में
अधिकारियों ने किस आधार पर शिक्षक को बर्खास्त किया था, जिसकी जानकारी नहीं
है। अब जो भी कोर्ट से आदेश मिलेंगे, उनका अनुपालन कराया जाएगा।
विभाग की लचर पैरवी से हुई बहाल
बर्र्खास्त होने के बाद शमा बेगम ने र्हाईकोर्ट की शरण ली थी, जिसमें बेसिक शिक्षा विभाग ने लचर और सत्यहीन पैरवी की। सूत्रों की माने तो कुछ विभागीय अधिकारियों ने लालच में आकर अपने ही विभाग की किरकिरी कराने से गुरेज नहीं की। लिहाजा कोर्ट ने 2014 में शमा बेगम के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बहाली के आदेश कर दिए। इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने नवंबर 2014 में फटाफट आदेश जारी कर शमा बेगम की प्राथमिक विद्यालय खीरी टाउन में नियुक्ति कर दी।
चार माह का भुगतान भी किया
तैनाती पाने के बाद वेतन भुगतान को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। लिहाजा शिक्षिका शमा बेगम ने कोर्ट में अवमानना वाद दायर किया, जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर चार का वेतन प्राप्त करने में कामयाब रहीं।
न्यायालय के आदेश पर टिकी निगाहें
इस प्रकरण में पुनर्विचार याचिका करने वाले खीरी टाउन निवासी डॉ. सुजाअत अली खान ने कहा है कि इस मामले में विभाग की पैरवी लचर रही हैै। अब विपक्षियों का जवाब जानने के उपरांत न्यायालय जो आदेश पारित करेगा, वह वर्तमान परिस्थितियों पर लागू होगा।