बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व समेत जिले के तीन वन प्रभागों और दक्षिण खीरी प्रभाग में सारस की शीतकालीन गिनती दो दिन बाद मंगलवार शाम पूरी हो गई। यह गणना दो पालियों में सुबह-शाम कराई गई।
नोडल अधिकारी और दक्षिण खीरी वन प्रभाग के डीएफओ संजय बिश्वाल ने बताया कि सारस गणना हर साल दो बार पूरे प्रदेश में एक साथ की जाती है। ग्रीष्मकालीन गणना जून और शीतकालीन दिसंबर में होती है। इस बार पूरे प्रदेश में 15 व 16 दिसंबर को एक साथ सारस गणना कराई गई। इसके लिए सारस की उपलब्धता वाले स्थलों को पहले ही चिह्नित कर लिया गया था।
गणना के लिए दक्षिण खीरी, उत्तर खीरी वन प्रभाग, पथ पौधरोपण और दुधवा को मिलाकर कुल 24 रेंज हैं। गणना के लिए प्रत्येक रेंज में दो-दो टीमें गठित की गई थीं। रेंजवार की जा रही गणना में 48 टीमों ने कार्य किया। टीमों ने एक साथ गणना स्थलों पर सुबह छह से आठ व शाम चार से छह बजे के बीच गिनती की है। टीमों ने सारस को देखकर उनकी गिनती अंकित की है। 22 दिसंबर को इस गणना का मिलान किया जाएगा।
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नम स्थानों और खेतों में पाए जाते हैं सारस
सारस ज्यादातर नम भूमि वाले खेतों, सीपेज इलाके में तालाबों के अलावा वेटलैंड और झीलों के किनारे पाए जाते हैं। अपेक्षा के अनुसार, इनकी संख्या न बढ़ने का सबसे बड़ा कारण खेतों में बड़ी मात्रा में कीटनाशक दवाओं का इस्तेमाल है, जिसकी वजह से अनाज और पानी विषैला हो रहा है, जो सारसों की वृद्धि में बाधक है। ग्रीष्मकालीन गणना में उत्तर प्रदेश में 19918 और जिले में 264 सारस दिखाई दिए थे। इसमें 248 वयस्क और 16 बच्चे शामिल थे। शीतकालीन गणना में कितने सारस दिखाई देते हैं। इसका पता आंकड़ों के मिलान के बाद पता चलेगा।