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बड़े कब्जेदारों को दी राहत, छोटी  जोत वालों की फसल जुतवा दी 

Thu, 14 Dec 2017 11:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो  लखीमपुर खीरी। 
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कब्जा - फोटो : अमर उजाला
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लखीमपुर खीरी। तालाब पर अवैध कब्जा हटवाने में तहसील निघासन प्रशासन ने खूब दरियादिली दिखाई है। तालाब की जमीन को कब्जा मुक्त कराने गई टीम ने जहां छोटी जोत वालों की फसल जुतवा दी, तो वहीं कई एकड़ में गन्ने की फसल बोए बैठे भूमाफिया को राहत देते हुए उन्हें गन्ना काटने की मोहलत दे दी गई। तहसील प्रशासन की इस दोहरी नीति से छोटे कब्जेदारों में नाराजगी है। उनका कहना है कि मोहलत तो उन्हें भी मिलनी चाहिए थी।
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ग्राम पंचायत भेड़ौरी के मजरा महाराजनगर में 38 एकड़ चार बीघा तालाब पर भूमाफिया द्वारा अवैध कब्जा करने की खबर का अमर उजाला ने खुलासा किया था। जांच में मामला सही पाए जाने पर भी तहसील प्रशासन कब्जेदारों के खिलाफ बेदखली की कार्रवाई करने में टालमटोल कर रहा था। हालांकि बुधवार को एसडीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदार सीओ निघासन के साथ मौके पर पहुंचे। राजस्व टीम ने पैमाइश कर करीब नौ एकड़ जमीन को जुतवाकर उसे कब्जे से बेदखल कराया था, लेकिन इस दौरान राजस्व टीम ने बड़े भूमाफिया पर खूब मेहरबानी दिखाई। 
एसडीएम अखिलेश यादव की मानें तो तालाब के गाटा संख्या 25/2 रकवा 6.921 हेक्टयर (बड़ी भूहर) तालाब की जमीन खाली पाई गई। इसमें मौके पर कुंभी और जलभराव मिला। गाटा संख्या 68/2 रकवा 4.428 हेक्टेयर (छोटी भूहर) पर कब्जा पाया गया। कब्जेदारों ने इस पर लाही और मसूर की फसल बो रखी थी, जिसे राजस्व टीम ने ट्रैक्टर चलवाकर जुतवा दिया और जमीन को कब्जा मुक्त कराया। 
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यहां खास बात यह रही कि तहसील प्रशासन ने जिन किसानों की लाही और और मसूर की फसल जुतवाई उनमें अधिकतर ऐसे लोग थे, जिन्होंने दो से लेकर अधिकतम पांच बीघा पर फसल बो रखी थी, लेकिन सीमांकन के दौरान ऐसे भूमाफिया जिन्होंने पांच से दस एकड़ जमीन पर कब्जा कर गन्ना बोया हुआ था उन पर राजस्व टीम ने खूब दरियादिली दिखाई। सूत्रों की मानें तो राजस्व टीम ने ऐसे बड़े कब्जेदारों से गन्ना कटने के बाद जमीन को कब्जा मुक्त करने को कहा है। तहसील प्रशासन की इस कार्रवाई से छोटे कब्जेदारों में आक्रोष है। 

कब्जा हटाया नौ एकड़ और रिपोर्ट 
में दिखाया पूरी जमीन हो गई खाली
भू अभिलेखों के अनुसार खाता संख्या 00119 पर कुल रकबा 15.6380 हेक्टेयर पर तालाब दर्ज है। यह तालाब रनवास तालाब से गांव महाराजनगर तक करीब डेढ़ वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसमें चार गाटा संख्या 4/2 रकबा 0.3560, 25/2 रकबा 6.9210, 68/2 रकबा 4.4280 और 16/160 रकबा 3.9330 हैं। लेखपाल की रिपोर्ट खुद बया करती है कि राजस्व टीम ने सिर्फ गाटा संख्या 25/2 बड़ी भूहर और 68/2 छोटी भूहर को अवैध कब्जे से मुक्त किया है। हल्का लेखपाल अनवर खां, देशराज वर्मा और हेमंत राजपूत की रिपोर्ट पर गौर करें तो दोनों गाटा संख्या के जुज भाग (एक कोना) में गन्ना खड़ा होने के कारण पैमाइश नहीं हो सकी। शेष कब्जा हटाकर तालाब की पूरी जमीन कब्जा मुक्त करा दी गई है। इस रिपोर्ट में शेष बचे गाटा संख्या 4/2 और 16/160 का जिक्र तक न कर एसडीएम को गुमराह किया गया है। इन दोनों गाटा संख्याओं से कब्जा हटाए बिना ही तालाब को अवैध कब्जे से मुक्त होने की रिपोर्ट एसडीएम को सौंप दी है। इससे लगता है कि कागजों में ही जमीन मुक्त दिखा दी है।

कब्जा हटाने के बाद ग्राम प्रधान पति के सुपुर्द कर दी जमीन 
तालाब की बड़ी भूहर और छोटी भूहर पर काबिज लोगों से तहसील प्रशासन ने कब्जा मुक्त कराकर जमीन को ग्राम प्रधान पति भेड़ौरी की सुपुर्दगी में दी है।

अवैध कब्जा करने वालों पर कोई रियायत नहीं की जाएगी। राजस्व कर्मियों ने यदि कब्जा हटवाने में लापरवाही की है तो इसकी पुन: जांच कराई जाएगी। जांच में कोई दोषी मिला तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। उनका लक्ष्य तालाब को पुन: जीवित करना है। 
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- शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम
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