बांकेगज। दुधवा टाइगर रिजर्व का जंगल सदियों से बाघों का पसंदीदा घर रहा है। यहां के घने जंगल में वुडलैंड, वेटलैंड और ग्रासलैंड का अद्भुत संतुलन बाघों के लिए अनुकूल प्राकृतवास ही नहीं भरपूर आहार भी उपलब्ध कराता है। यही कारण है कि दुधवा में बाघों का कुनबा तेजी से बढ़ रहा है।
टाइगर एस्टीमेशन 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या 153 से अधिक है। यह संख्या वर्ष 2018 के टाइगर एस्टीमेशन से 46 अधिक है। वर्ष 2018 की गणना में यहां 107 बाघ मिले थे, जबकि यहां 135 बाघ होने की संभावना जताई गई थी। दुधवा में बाघों की वृद्धि दर करीब 45 फीसदी रही है। बाघों की संख्या के मामले में देश के 51 टाइगर रिजर्व में से दुधवा टाइगर रिजर्व पांचवें पायदान पर है।
दुधवा में बाघों की आबादी बढ़ने के साथ ही उनकी सुरक्षा की चुनौतियां भी बढ़ रहीं हैं। जंगल के अंदर इंसानी घुसपैठ के कारण उनके प्राकृतवास में खलल पड़ रहा है। बाघ गन्ने के खेत से होते हुए इंसानी बस्तियों की ओर बढ़ रहे हैं। बड़ी संख्या में बाघों ने गन्ने के खेतों में अपना बसेरा बना रखा है। हालत यह है कि इंसान बाघों की मांद में ताकझांक तो बाघों को इंसानी बस्ती की ओर रुख करना पड़ रहा है।
इस हालत में न केवल मानव जीवन पर खतरा बढ़ रहा है, बल्कि जंगल छोड़कर बाहर निकलने पर बाघों के लिए भी खतरा बढ़ रहा है। एस्टीमेशन के दौरान बाघों के जंगल से बाहर रहने के कारण इनकी तस्वीरें कैमरे में ट्रैप नहीं हो पाती, जिससे यह गिनती में भी छूट जाते हें।
बाघों की आबादी में इस तरह हो रही बढ़ोतरी
वर्ष - बाघ
2006 - 70+
2010 - 80+
2014 - 68+
2018 - 107+
2022 - 153+
जंगल से बाघों का पलायन बड़ी चुनौती
दुधवा टाइगर रिजर्व के 20 से 25 बाघ हमेशा जंगल छोड़कर गन्ने के खेतों में बसेरा बनाए रहते हैं, जो बाद में बाघ मानव संघर्ष का कारण बनते हैं। पिछले कुछ वर्षों में ही सौ से अधिक लोग बाघ का शिकार हो चुके हैं। कई बाघों को भी इसी संघर्ष में अपनी जान गंवानी पड़ी है।
दुधवा टाइगर रिजर्व बाघों के लिए सबसे अनुकूल प्राकृतवास है। अनुकूल पारिस्थितिकी, वातावरण और भोजन-पानी की पर्याप्त उपलब्धता के साथ बेहतर प्रबंधन से दुधवा में बाघों की आबादी तेजी से बढ़ रही है। यह जिले के लिए ही नहीं, बल्कि देश के लिए गौरव की बात है। - डॉ. एच राजामोहन, एफडी, दुधवा टाइगर रिजर्व