निघासन के रौली पुरवा निवासी भूमिहीन पट्टेदार। संवाद
रमियाबेहड़। ब्लॉक क्षेत्र के गांव रौलीपुरवा मजरा गौरिया निवासी एक भूमिहीन पट्टे की जमीन पर कब्जा पाने के लिए 25 वर्ष से भटक रहा है। कई बार प्रार्थनापत्र देने के बाद भी उसकी जमीन की पैमाइश नहीं हो पाई।
रौली पुरवा निवासी स्वामी दयाल भूमिहीन है। 25 वर्ष पहले इसके नाम से पट्टा स्वीकृत हुआ था। खतौनी में जमीन स्वामी दयाल के नाम दर्ज हो गई, लेकिन कब्जा नहीं दिलाया गया। सन् 2013 में कब्जा पाने के लिए स्वामी दयाल ने उपजिलाधिकारी न्यायालय निघासन में वाद दायर किया। सात मार्च को उपजिलाधिकारी न्यायालय से स्वामी दयाल के हक में फैसला आया।
साथ ही कब्जेदारों पर जुर्माना भी लगाया गया। फैसला आने के बाद भूमिहीन कब्जा पाने के लिए तहसील के चक्कर लगा रहा है। सुनवाई न होने पर पीड़ित ने जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री के जनता दर्शन में भी गुहार लगाई, लेकिन न तो पैमाइश हुई और न ही कब्जा दिलवाया गया। पट्टेदार के पुत्र राकेश के मुताबिक वह मजदूरी करके परिवार का पेट चलाता है। पिछले डेढ़ महीने से पट्टे की पैमाइश के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।
इस बाबत उपजिलाधिकारी राजीव निगम ने बताया सात मार्च को न्यायालय से स्वामी दयाल के पक्ष में फैसला आया है। जल्द टीम बनाकर पट्टाधारक को कब्जा दिलवाया जाएगा।