मोहम्मदी। मोहम्मदी का रंगोत्सव क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखता है। यहां होली महज रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि परंपरा, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव बन जाती है। दूर-दूर से लोग इस अनूठे आयोजन को देखने पहुंचते हैं।
रंगोत्सव के दिन पूरे नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है। ढोल-नगाड़ों, डीजे बैंड और पारंपरिक ‘लिल्ली घोड़ी’ के साथ ट्रैक्टर-ट्रालियों पर प्रेशर मशीन से रंग की बौछारें की जाती हैं। पीछे-पीछे सजी आकर्षक झांकियां उत्सव को और भी रंगीन बना देती हैं।
समाज सेवा समिति के अध्यक्ष अतुल रस्तोगी बताते हैं कि इस शोभायात्रा की शुरुआत उनके पिता स्वर्गीय लाल कामेश्वर दयाल रस्तोगी ने वर्ष 1950 में की थी। वर्ष 1964 में देवी स्थान मंदिर में होली मिलन मेले की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी निरंतर जारी है। पहले शोभायात्रा में लोकगीतों की टोलियां होली गीत गाकर वातावरण को सराबोर करती थीं। स्व. ननकाई कनौजिया, स्व. छुटकाई, ख्याली राम, रामलाल जैराखन और निरंजन जैसे कलाकार इस परंपरा का हिस्सा रहे।
15 अगस्त 1990 को समाज सेवा समिति का गठन हुआ। अतुल रस्तोगी, अनुराग शुक्ला, राजेंद्र मिश्र और अर्जुन श्रीवास्तव के प्रयासों से 1991 से शोभायात्रा का संचालन व्यवस्थित रूप से शुरू हुआ, जो आज भी निरंतर चल रहा है।
शोभायात्रा में भगवान गणेश, राधा-कृष्ण, राम-सीता, शिव-पार्वती और वृंदावन की लठमार होली जैसी झांकियां सजाई जाती हैं, जो सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक एकता का संदेश देती हैं। दूसरे दिन फ्रेंड्स क्लब की तरफ से यूनियन गल्ला मंडी बाजारगंज से एक और शोभायात्रा निकाली जाती है। तीसरे दिन देवी स्थान मंदिर में होली मिलन समारोह आयोजित होता है। संवाद