सोमवार को तीनों का गमगीन माहौल में हुआ अंतिम संस्कार
आंध्र प्रदेश में फरधान के हर्षित और ईसानगर के शुभम और नितीश की डूबने से हुई थी मौत
खीमपुर खीरी। आंध्र प्रदेश के गुंटूर में शुक्रवार को कृष्णा नदी में डूबे खीरी के तीन किशोरों की मौतों के बाद सोमवार को उनके शव जनपद में पहुंचे। किशोरों के शव के गांव में पहुंचते ही उनके घरों में मातमी सन्नाटा पसर गया। फरधान के हर्षित का सोमवार सुबह तो ईसानगर थाना क्षेत्र के शुभम और नितीश का दोपहर में अंतिम संस्कार किया गया।
धौरहरा। सोमवार को कि करीब 1800 किलोमीटर की दूरी से सड़क मार्ग से ईसानगर थाना इलाके में मृतक शुभम और नितीश के शव पहुंचे। थाना क्षेत्र के चक मूसेपुर निवासी अनिल कुमार त्रिवेदी के 17 वर्षीय पुत्र शुभम का शव जब सुबह सवा दस बजे गांव पहुंचा तो वहां पर मातमी सन्नाटा पसर गया। चारों तरफ रिश्तेदार व ग्रामीणों का हुजूम चल पड़ा और वहां पर हर एक शख्स की आंख नम थी। चारों तरफ चीख पुकार मची थी। जबकि, ढखिनियां गांव में मृत किशोर नितीश का शव साढ़े दस बजे के करीब पहुंचा तो उसके घर के बाहर भी रिश्तेदारों व ग्रामीणों का जमावड़ा लग गया।
दोनों किशोरों को दी मुखाग्नि
सोमवार दोपहर को शुभम और नितीश का जालिमनगर पुल के नीचे घाघरा घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। दोनों को हिंदू धर्म के अनुसार मुखाग्नि दी गई। गुरुकुल विद्यालय में आचार्य की शिक्षा ग्रहण करने की वजह से उनका यज्ञोपवीत हो चुका था, जिसकी वजह से उनकी अलग-अलग चिता सजाकर उनके मृतक किशोरों के पिता ने उन्हें मुखाग्नि दी।
उधर, पीड़ितों के घर राजनीतिक दलों के नेताओं का भी आना लगा रहा। सबसे पहले धौरहरा विधायक पुत्र राजीव अवस्थी ने ढखिनिया मे वीरेंद्र दीक्षित के घर पहुंचे तो वहीं चकमूसेपुर में वरुण यशपाल चौधरी पहुंचे, जबकि जालिमनगर पुल शमशान घाट पर डॉ. आरआर मिश्रा, आनंद मोहन त्रिवेदी, विनोद शंकर अवस्थी, खिलाड़ी सिंह, रमेश सिंह मूड़ी समेत राजस्व व धौरहरा पुलिस प्रशासन मौजूद रहा।
चौथे दिन हर्षित का शव आया, घरवालों के नहीं रुक रहे आंसू
फरधान। आंध्र प्रदेश के वैदिक विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रहे हर्षित की नदी में डूबकर मौत होने के बाद उसका शव सोमवार की सुबह चार बजे गांव पहुंचा, जिसे देखकर वहां परिजन की चीख पुकार मच गई। सुबह आठ बजे के करीब उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
जिला मुख्यालय से मोहम्मदी रोड के किनारे 20 किलोमीटर पश्चिम स्थित नयागांव में रहने वाले किसान राम शंकर शुक्ला के दो बेटे और एक बेटी है। बड़ा बेटा रचित 18 वर्ष पिता के काम में हाथ बटाता है। छोटी बेटी शिवानी 17 वर्ष अपनी मां के घरेलू काम में सहयोग करती है। जबकि सबसे छोटे बेटे हर्षित को वेदाचार्य की शिक्षा ग्रहण करने के लिए करीब पांच साल पहले आंध्र प्रदेश भेजा था। सोचा था कि जब बेटा वेदाचार्य बन जाएगा तो उनका भी इलाके में नाम होगा, लेकिन शुक्रवार की शाम नदी में स्नान करते समय अन्य चार साथियों के साथ उसकी भी डूबने से मौत हो गई।
बेटे के वेदाचार्य की शिक्षा पूरी होने के अब कुछ ही दिन बचे थे। अपनी गरीबी की परवाह किए बिना मां बाप ने अपने बेटे हर्षित को वेदाचार्य बनाने का सपना पाल रखा था। इसके लिए वह कठिन परिश्रम कर अपने बेटे को आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में संचालित गुरुकुल को भेजा था। वहां पर हर्षित वेदाचार्य का कोर्स कर रहा था। 5 वर्ष पूरे हो चुके थे। कोर्स पूरा होने में अब कुछ ही समय शेष बचा था। बच्चे को वेदाचार्य बनाने का सपना साकार होना शायद नियति को मंजूर नहीं था। जिस समय बूढ़े मां बाप अपने बच्चों को वेदाचार्य बनते देखने का ख्वाब देख रहे थे उसी समय अचानक उनको बेटे की मौत की खबर मिली। उनके पैरों तले से मानो जमीन ही खिसक गई। संवाद