लखीमपुर खीरी। अखाड़ों से सपनों की उड़ान भरने की चाह लिए जिले की महिला खिलाड़ी कुश्ती में रोज पसीना बहा रही हैं। इससे महिला सशक्तीकरण की मजबूत मिसाल भी पेश कर रही हैं।
जिले के विभिन्न स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राएं कुश्ती को कॅरिअर के रूप में अपना रही हैं। कई जिला, मंडल और यहां तक कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी भाग लेकर जिले का नाम रोशन कर चुकी हैं। बावजूद इसके प्रशिक्षण सुविधाओं, प्रमाणित कोच, नियमित प्रतियोगिताओं के अभाव में उनका सफर कठिन बना हुआ है।
खिलाड़ियों का कहना है कि मेहनत और लगन में कोई कमी नहीं है लेकिन संसाधनों की कमी के कारण वे कई बार निर्णायक मुकाबलों में पिछड़ जाती हैं। जिला और मंडल स्तर पर नियमित प्रतियोगिताएं न होने से खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धात्मक माहौल भी नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनका आत्मविश्वास प्रभावित हो रहा है। राष्ट्रीय बालिका दिवस पर कुछ खिलाड़ियों में इसकी टीस भी दिखी।
संवाद
मैं रोज कॉलेज में अभ्यास करती हूं लेकिन सही ट्रेनिंग न मिलने से बाहर की प्रतियोगिताओं में दिक्कत आती हैं। अगर जिले में सुविधाएं मिलें तो हम भी मेडल ला सकते हैं।
-कविता वर्मा, कुश्ती खिलाड़ी
लड़कियों के लिए कुश्ती चुनना आसान नहीं होता, फिर भी परिवार का सहयोग मिल रहा है। कोच और प्रतियोगिताएं बढ़ें तो हमारा आत्मविश्वास और मजबूत होगा।
- व्याख्या मिश्रा, कुश्ती खिलाड़ी
हम मेहनत से पीछे नहीं हटती, बस मौके कम मिलते हैं। नियमित टूर्नामेंट हों तो हमें अपनी गलतियां सुधारने और आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
- हिमांशी, कुश्ती खिलाड़ी
कुश्ती ने मुझे आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाया है। यह सिर्फ खेल नहीं, महिलाओं के सशक्तीकरण का माध्यम है। सरकार और खेल विभाग से उम्मीद है कि हमें बेहतर सुविधाएं मिलें।
- अनन्या मिश्रा, कुश्ती खिलाड़ी
अनन्या मिश्रा
अनन्या मिश्रा
अनन्या मिश्रा