बांकेगंज। पल्स पोलियो जैसे महत्वपूर्ण और राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम जिम्मेदारी निभाने वाले स्वयंसेवकों की स्थिति मनरेगा मजदूरों से भी बदतर है। पांच दिनों तक लगातार चलने वाले पल्स पोलियो अभियान के दौरान इन स्वयंसेवकों को जो दैनिक भत्ता दिया जाता है, वह अकुशल श्रमिकों से भी कम है।
मनरेगा मजदूरों की दिहाड़ी सरकार ने 204 रुपये तय कर रखी है और उन्हें प्रति जॉब कार्ड साल में 100 दिन रोजगार देने की गारंटी भी है। वहीं, पल्स पोलियो अभियान के दौरान सिर्फ पांच दिन काम करने वाले स्वयंसेवकों को 75 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाता है। यह भुगतान पाने में भी महीनों लग जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग की गठित टीम में काम करने वाले यह स्वयंसेवक सुबह से शाम तक कड़ी धूप में घर-घर, ईंट-भट्ठों, टेंपो स्टैंड पर जाकर लोगों को प्रेरित कर उनके नौनिहालों को पोलियो की खुराक पिलाने का काम करते हैं। स्वास्थ्य विभाग इनकी स्थिति को जानकर भी अनजान बना हुआ है।