जुर्माना भी डाला गया, तमंचा फैक्ट्री हुई थी बरामद
लखीमपुर खीरी। असलहा फैक्ट्री पकड़ने गए पुलिस पार्टी पर जानलेवा हमला करने के 14 साल पुराने मामले में डीजे एडीजे परशुराम ने हमलावर को सात वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही हमलावर पर 6000 रुपये का जुर्माना लगाया है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी सुनील सिंह तोमर ने बताया मैगलगंज पुलिस 20 अक्टूबर 2008 को गश्त पर निकली थी। एसआई देवेश शर्मा को गांव चौखड़िया में नाजायज असलाह फैक्ट्री चलाए जाने की खबर मिली। शाम करीब 8:00 बजे जब पुलिस टीम तमंचा बनाए जाने की फैक्ट्री के पास पहुंचे तो अवधेश लोहार और उसके भाई नरेश लोहार ने नए गांव के छोटे लोहार के साथ मिलकर पुलिस पार्टी पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी थी। पुलिस ने किसी तरह घेरकर आरोपियों को पकड़ा तो उनके पास कई निर्मित और अधबने तमंचे के साथ ही लोहे की नाल व तमंचा बनाने के उपकरण भी बरामद हुए। अदालती सुनवाई के दौरान अवधेश और छोटे ने अदालत में पेशी पर आना छोड़ दिया तो अदालत ने गिरफ्तारी का आदेश दिया लेकिन आरोपी बदस्तूर फरार रहे, जिसके चलते अदालत ने अवधेश और छोटे की फाइल अलग करते हुए नरेश लोहार की ही सुनवाई शुरू कर दी। एसआई देवेश शर्मा, विद्यासागर वर्मा, एसआई संतोष मिश्रा की गवाही दर्ज कराई गई और बरामद हुए निर्मित और आधे बने तमंचे अदालत में पेश किए गए। एडीजे परशुराम ने मामले की सुनवाई के बाद गुरुदेव जोहा निवासी नरेश लोहार को पुलिस पार्टी पर जानलेवा हमला करने के मामले में दोषी पाया और उसे 7 वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये की जुर्माने की सजा सुनाई है। नाजायज तमंचा फैक्ट्री चलाने के मामले में नरेश लोहार को पांच वर्ष के कठोर कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने अपने फैसले में दोनों सजाएं एक साथ साथ चलने की बात कहीं है जिसके चलते नरेश लोहार सात वर्ष के लिए सश्रम कारावास की सजा मिली। जुर्माना न भरने की दशा में नरेश लोहार को 2 महीने की अतिरिक्त कारावास काटनी होगी।