लगातार मौतें होने के बाद भी वन विभाग संजीदा नहीं
अदलाबाद में तेंदुए के हमले में किशोर की मौत का मामला
निघासन। दुधवा टाइगर रिजर्व जोन के जंगलों से घिरे तराई क्षेत्र में बाघ और तेंदुआ के हमले से लगातार मौतें हो रही हैं। एक साल में दस मौतें हो चुकी हैं। लगातार मौतें होने के बाद भी वन विभाग संजीदा नहीं।
क्षेत्र के गांव मंझरा पूरब में पिछले साल नवंबर में दलराज पुर निवासी ज्ञान सिंह खेत देखने गए थे। वहां पर बाघ ने हमला बोलकर उसे मार डाला था। उसके बाद इसी माह में मंझरा पूरब निवासी बहोरी यादव, प्यारेलाल, अवधेश यादव को भी बाघ ने मार डाला था। इसी गांव के बदलू मवेशी चराने के लिए खेतों की ओर गए थे। वहां पर बाघ ने हमलाकर उसे मार डाला था। दिसंबर महीने ें सिंगाही थाने के गांव दलराजपुर निवासी सरजीत सिंह को भी बाघ ने मार डाला था। अप्रैल में गांव मंझरा पूरब निवासी अवधेश पर भी बाघ ने हमला कर उसे मार डाला था। गांव अदलाबाद निवासी साहिल पर तेंदुआ ने हमला बोलकर मार डाला था। हालांकि बीते पांच साल में तेंदुआ के हमले की यह पहली घटना है। लुधौरी रेंजर राममिलन ने बताया कि तेंदुआ की तलाश में टीम लगी है। शीघ्र ही उसे पकड़ा जाएगा।
बंगाली कॉलोनी में पहुंचा बाघ ग्रामीणों के शोर पर भागा
बांकेगंज। बंगाली कॉलोनी में रविवार की शाम बाघ दिखने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई। ग्रामीणों के शोर मचाने पर बाघ जंगल में जा घुसा। वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों से सतर्क रहने को कहा है।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी और भीरा रेंज जंगल से सटी बंगाली कॉलोनी निवासी मोहन मंडल अपने घर के पीछे तालाब किनारे लगी धान की फसल को देखने गए थे। इस बीच उसे उल्ल नदी की ओर से एक बाघ गांव की तरफ आता दिखाई दिया। मोहन के शोर मचाने पर गांव निवासी डॉ. मानवेंद्र सिंह, शशि मंडल, भीम मंडल, महादेव, प्रणव, मधई, गोपाल आदि ग्रामीण हाथों में टार्च लेकर पहुंच गए। बावजूद इसके बाघ कुछ दूरी पर एक खेत में डटा खड़ा रहा। बाघ को सामने खड़ा देख दहशत में आए लोगों ने शोर मचाकर और आग जलाकर किसी तरह वहां से उसे हटाया। इसके बाद बाघ गांव से सटे जंगल की झाड़ियों में घुस गया।
मैलानी-भीरा रेंज सीमा से सटे बंगाली कॉलोनी गांव के पास एक बाघ पहुंचने की सूचना मिली है। वन कर्मियों से बाघ की निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। वन्यजीव अकारण हमलावर नहीं होते। ग्रामीण डरें नहीं, सतर्कता बरतें। बाघ दिखने पर इसकी सूचना तत्काल वन कर्मियों को दें।
- डॉ. अनिल कुमार पटेल, डीडी, डीटीआर, बफरजोन