बांकेगंज। कभी अंग्रेजों और राजा महाराजाओं की शिकारगाह रही मड़हा कोठी से अब बाघों के संरक्षण का कार्य किया जाएगा। करीब 150 साल पुरानी इस कोठी का वन विभाग ने पांच लाख रुपये से सौंदर्यीकरण कराना शुरू करा दिया है। कोठी में अधिकारियों के लिए गेस्ट हाउस में बनाए जा रहे हैं।
बांकेगंज से करीब 12 किलोमीटर दूर किशनपुर सेंक्चुरी की मैलानी रेंज के घने जंगल में अंग्रेज अफसरों ने अपने मित्र राजा-महाराजाओं के शिकार के लिए मड़हा सेक्शन में इस कोठी का निर्माण कराया था। आजादी के बाद यह कोठी वन विभाग के अधिकारियों के विश्राम स्थल के रूप में काम आ रही थी। कोठी पुरानी हो जाने के कारण इसका प्लास्टर आदि उखड़ने लगा था। इसलिए वन विभाग ने इसका सौंदर्यीकरण कराने का निर्णय लिया। सौंदर्यीकरण का कार्य अब लगभग पूरा हो चुका है। जल्द ही इस कोठी से बाघ की गतिविधियों का संचालन शुरू करने की वन विभाग की योजना है।
किशनपुर सेंक्चुरी की मैलानी रेंज वन्यजीव विहार के मड़हा सेक्शन में करीब 150 साल पहले बनी मड़हा कोठी का सौंदर्यीकरण कराया जा रहा है। इसमें करीब पांच लाख रुपये की लागत आएगी। इसका इस्तेमाल विभागीय कार्यों में होगा। कोठी जंगल के बीच में होने से बाघ की गतिविधियों पर भी निगाह आसानी से रखना संभव होगा। - संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक/ फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व