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Lakhimpur Kheri News: मिट्टी की सेहत खराब...फसल की पैदावार पर पड़ रहा असर

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लखीमपुर खीरी। जनपद की मिट्टी में जीवांश कार्बन और फॉस्फेट की मात्रा कम है। इससे मिट्टी की सेहत खराब हो गई है। मिट्टी में पोषक तत्व कम होने पर फसलों की पैदावार पर 10 से 15 फीसदी असर पड़ा है। हालांकि मिट्टी में पोटाश भरपूर मात्रा है। विभागीय अफसरों का दावा है कि पिछले कई वर्षों की अपेक्षा जनपद की मिट्टी में सुधार हुआ है।
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मिट्टी जांच के लिए छाउछ चौराहे के पास डीडी कृषि कार्यालय परिसर में मृदा परीक्षण प्रयोगशाला है। जहां मिट्टी के मुख्य व सूक्ष्म पोषक तत्वों की जांच की जाती है। मिट्टी जांच के लिए नाम मात्र का शुल्क है। कोई भी किसान अपने खेत की मिट्टी लाकर यहां जांच करा सकता है। जांच में अगर कोई पोषक तत्व कम पाए जाते हैं तो प्रयोगशाला से उसे पूरा करने के लिए टिप्स भी दिए जाते हैं।
वर्ष 2022-23 में मृदा स्वास्थ्य परीक्षण के तहत अभियान चलाकर जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से करीब 10326 हजार मिट्टी के सैंपल लिए गए थे। इसमें जीवांश कार्बन, फॉस्फेट और पोषण व अन्य पोषक तत्वों की जांच प्रयोगशाला में की गई। इसमें जीवांश कार्बन में 1829 अति न्यून स्तर, 8418 न्यून स्तर पर पाया गया, जबकि 79 जांच रिपोर्ट मध्यम आईं। वहीं, फॉस्फेट में 359 में अति न्यून और 9910 में न्यून स्तर व 57 में मध्यम रिपोर्ट आई है, जबकि पोटाश 10231 जांच रिपोर्ट मध्यम, 95 उच्चस्तर पाया गया।
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अत्याधिक रसायनिक खाद खराब करती है मिट्टी की सेहत
विभागीय अफसर बताते हैं कि अधिकांश किसान अपनी फसलों में अत्याधिक व मानक विहीन रसायनिक खादों का इस्तेमाल करते हैं, जिसकी सीधा असर मिट्टी की सेहत पर पड़ता है। मिट्टी में पोषक तत्व कम हो जाते हैं और फसल पैदावार कम हो जाती है। किसानों को हमेशा संतुलित खाद का इस्तेमाल करना चाहिए। कोशिश करें कि वह जैविक खाद इस्तेमाल करें।

मिट्टी में पोषक तत्वों का स्तर
मुख्य पोषक तत्व अति न्यून स्तर न्यून स्तर मध्यम उच्च स्तर
जीवांश कार्बन- 0.20 तक- 0.21 से 0.50- 0.51 से 0.80- 0.80 के ऊपर
फास्फेट- 10.0 तक- 10.1 से 20- 20.1- 40- 40 से ऊपर
पोटाश- 50 तक- 51-100- 101-205- 250 से ऊपर
नोट- जीवांश कार्बन प्रतिशत में और फास्फेट और पोटाश प्रति हेक्टेयर किलो ग्राम में है।



अति न्यूनतम स्तर सबसे खराब स्थिति
मिट्टी में अगर पोषक तत्व अति न्यून स्तर आता है तो उस जगह की मिट्टी बहुत ही खराब है। ऐसी स्थिति में फसल की पैदावार 15 फीसदी से अधिक असर पड़ता है, जबकि न्यूनतम स्तर होने पर कुछ स्थिति ठीक होती है। यह स्तर होने पर आठ से 10 फीसदी पैदावार पर असर होता है। मध्यम स्तर होना ठीकठाक रहता है। विभागीय अफसरों की माने तो सिर्फ अति न्यून स्तर होने से फसल पर असर पड़ता है। न्यून स्तर से ज्यादा असर नहीं पड़ता है।


एएनआई जांच के लिए भेजे गए 90 नमूने
प्रयोगशाला के लैब टेक्नीशियन अनूप अवस्थी ने बताया कि पिछले वर्षों की अपेक्षा जिले की मिट्टी में काफी सुधार हुआ है। प्रयोगशाला में जो जांचें की गई है, उसमें 90 जांचों को एएनआई प्रयोगशाला लखनऊ भेजा गया है। यह रेंडम जांच है। इससे यह सिद्ध होगा कि जिलास्तर पर जो जांच हुई हैं वह ठीक हैं या नहीं।



जनपद में कुछ जगह मिट्टी की सेहत खराब है। इसके लिए किसानों को लगातार जागरूक किया जाता है। किसानों को जैविक खाद इस्तेमाल करने पर जोर दिया जाता है। पिछले वर्षों की अपेक्षा इस बार मिट्टी के पोषक तत्वों में काफी सुधार हुआ है। -अरविंद मिश्र, डीडी कृषि
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