इंटरनेट से आम लोगों तक पहुंच रहा है दुर्लभ साहित्य, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहा प्रचार प्रसार
हिंदी को जन जन तक पहुंचाने में सोशल मीडिया बड़ी भूमिका निभा रहा है। हिंदी प्रेमी इसे बढ़ाने के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी की स्वीकारता बढ़ी है। जो साहित्य लोगों की पहुंच से दूर होता जा रहा था, इंटरनेट के जरिए आम लोगों तक पहुंच रहा है। भविष्य में भाषा को लेकर जो क्रांति होगी वह हिंदी और सोशल मीडिया के तालमेल के माध्यम से होगी।
सोशल मीडिया ने हिंदी साहित्य को सर्वसुलभ बनाया
समय बदलने पर अभिव्यक्ति के आयाम भी बदलते हैं। इंटरनेट के आने से हिंदी को बहुत फायदा हुआ है। सोशल मीडिया ने हिंदी को विदेशों में भी लोकप्रिय बनाया, जो साहित्य आम लोगों से दूर हो रहा था, वह इंटरनेट के जरिए आमजन की पहुंच में आ गया है। जिले के कवि राम शंकर त्रिवेदी की कविता इंटरनेट के जरिए पढ़ कर उस पर शोध भी कराया। इंटरनेट के जरिए जितनी तेजी से लोग एक दूसरे से जुड़ रहे हैं उतनी ही तेजी से हिंदी का भी प्रसार हो रहा है। अब हिंदी उत्पादों व बाजार की भाषा और राजनीति का एजेंडा बन गई है।
डॉ. निरुपमा अशोक, प्राचार्या,
भगवानदीन आर्यकन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय
हिंदी की सर्वग्राह्यता ही इसकी सबसे बड़ी विशेषता
समाज के सांस्कृतिक उत्थान से भाषा का उत्थान जुड़ा है। हिंदी समाज की संस्कृति का हिस्सा है। सर्वग्राह्यता ही हिंदी की सबसे बड़ी विशेषता है। इसी विशेषता के चलते हिंदी लगातार समृद्ध हुई है। सोशल मीडिया में हिंदी की लोकप्रियता बढ़ने से हिंदी और ज्यादा समृद्ध हो रही है। जहां तक सोशल मीडिया पर भाषा की शुद्धता का सवाल है शुद्धतावादी आग्रह भाषा के विकास को रोकता है। सोशल मीडिया पर बढ़ती हिंदी से हिंदी को फायदा हो रहा है।
डॉ. सत्येंद्र कुमार दुबे, विभागाध्यक्ष
युवराजदत्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय, लखीमपुर खीरी।
सोशल मीडिया से हिंदी की लोकप्रियता बढ़ी
बीए की छात्रा सौम्या ठाकुर कहती हैं कि सोशल मीडिया से हिंदी को काफी बल मिला है। इससे हिंदी पूरे देश के साथ विदेशों में भी लोकप्रिय हो रही है। बीए की ही छात्रा ममता का कहना है कि सोशल मीडिया से हिंदी की लोकप्रियता में और भी इजाफा हुआ है।
शिवांगी बाजपेई का कहना है कि हिंदी को राजभाषा नहीं, राष्ट्रभाषा का दर्जा मिलना चाहिए। सोशल मीडिया ने हिंदी की लोकप्रियता में चार चांद ही लगाए हैं। बीए की छात्रा शिखा शुक्ला बोलीं कि इंटरनेट में पैठ बनाकर हिंदी ने अपनी वैज्ञानिकता भी साबित कर दी है।