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भूमि से प्रकट हुआ था  भुइफोरवानाथ का शिवलिंग  

Sun, 16 Jul 2017 10:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी। 
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भुइफोरवानाथ का शिवलिंग - फोटो : अमर उजाला
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तराई क्षेत्र के लाखों लोगों की आस्था का है केंद्र 
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सावन के हर सोमवार को लगता है मेला 
शहर स्थित प्राचीन भुइफोरवानाथ शिव मंदिर तराई क्षेत्र के लोगों के लिए गहन आस्था का केंद्र है। यह शिवलिंग कितना पुराना है इसका कोई उल्लेख नहीं मिलता। शिवलिंग के प्रकट होने के बारे में मान्यता है कि यह शिवलिंग भूमि के अंदर से प्रकट हुआ था, इसीलिए इसका नाम भुइफोरवानाथ पड़ा। मंदिर का निर्माण सैकड़ों साल पहले महेवा स्टेट के तत्कालीन शासकों ने कराया। बाद में समय-समय पर इसका जीर्णोद्धार हुआ। 
नैमिष क्षेत्र के लखीमपुर में कभी घने जंगल हुआ करते थे। बाद में जिले में कई स्टेट स्थापित हुईं। लखीमपुर का जंगल महेवा स्टेट के अधिकार क्षेत्र में आया। महेवा स्टेट के तत्कालीन शासकों ने जब इस जंगल का कटान शुरू किया तो इस स्थान पर दिव्य शिवलिंग दिखाई दिया। महेवा स्टेट के लोगों ने इस शिवलिंग को उखाड़कर स्टेट की राजधानी महेवागढ़ी में स्थापित करने की ठानी। काफी प्रयास के बाद भी वे शिवलिंग को खोद कर निकाल नहीं पाए। उल्टे शिवलिंग बढ़ता चला गया। थक हार कर शिवलिंग को उसी जगह रहने दिया। बाद में इस स्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया। इस स्थान की मान्यता दूर-दूर तक है। बताते हैं कि यह शिवलिंग एक स्तंभ के रूप में है।
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भुइफोरवानाथ मंदिर करीब 10 फिट ऊंचे एक विशाल चबूतरे पर बना हुआ है। प्रवेश द्वार पूरब की ओर है। गर्भगृह में दिव्य पाषाण शिवलिंग के अलावा पार्वती, गणेश और नंदी की प्रतिमा स्थापित है और शिखर गुंबदाकार है। मंदिर परिसर में राधा-कृष्ण और हनुमान जी का भी मंदिर है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर लगे दो वटवृक्ष आपस में जुड़ कर प्राकृतिक प्रवेश द्वार का निर्माण करते थे। यह दोनों पेड़ पिछले साल सावन के अंतिम सोमवार को एक साथ गिर गए। इनकी जगह उन्हीं पेड़ों की शाखाओं को लगाया गया है। मंदिर भव्य और विशाल होने के साथ यहां आने वाले लोगों को शांति प्रदान करते हैं। प्राचीन भुइफोरवानाथ मंदिर में यूं तो पूरे साल श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है लेकिन पूरे सावन यहां भक्तों की भारी भीड़ रहती है। सावन के सोमवार को तो यहां दिन भर मेला रहता है। दूर दूर से कांवड़िये आकर पवित्र नदियों के जल से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। शिवरात्रि पर भी मंदिर में रुद्र महायज्ञ समेत कई धार्मिक आयोजन होते हैं। सावन के हर सोमवार को श्रद्धालु भंडारे का आयोजन करते हैं।
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