निघासन। ग्रंट नंबर 12 गांव में शारदा नदी का कहर जारी है। बुधवार को 10 और घरों के साथ तीन सड़कें और कई बिजली के खंभे नदी की तेज धारा में समा गए, जिससे ये परिवार भी बेघर हो गए।
गांव में अब तक 81 से अधिक मकान शारदा में विलीन हो चुके हैं। दो प्राचीन मंदिर भी नदी की भेंट चढ़ चुके हैं। बुधवार को गांव के नेकपाल, रामशंकर, सर्वेश, रामप्यारी, प्रमोद, कालिका, श्रीकांत, देवकी देवी, रामसागर और खुशीराम के मकान पलक झपकते ही नदी में समा गए। ग्रामीणों ने बताया कि जलस्तर घटने के बाद भी कटान का सिलसिला थम नहीं रहा। नदी अब भी तेजी के साथ कटान कर रही है, जिससे गांव का अस्तित्व खतरे में है और लोग अपने भविष्य को लेकर हताश हो चुके हैं।
कटान प्रभावित परिवारों ने भी सड़क किनारे तिरपाल डालकर शरण ले रखी है। महिलाएं और बच्चे खुले आसमान के नीचे दिन-रात गुजारने के लिए मजबूर हैं। छोटे बच्चों के लिए दूध और दवा की किल्लत है तो वहीं मवेशियों के चारे का इंतजाम करना ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
कटान से गांव की बिजली व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। बिजली के खंभे और तार शारदा की धारा में समा चुके हैं। अंधेरे में डूबे ग्रामीण अब जंगली जानवरों के हमले की आशंका से भी दहशत में हैं।
प्रशासन पर उठाए सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बाद भी प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य में सक्रियता नहीं दिखाई। अगर समय रहते ठोस कदम उठाए गए होते तो शायद गांव को पूरी तरह मिटने से बचाया जा सकता है।
इस संबंध में तहसीलदार मुकेश वर्मा ने बताया कि नदी कटान कर रही है। ग्रामीणों को ऊंचे स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी गई है। साथ ही लेखपाल को रोजाना कटान की रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। प्रतिदिन रिपोर्ट तैयार कर जिला मुख्यालय पर सूचना भी भेजी जा रही है। जिनके घर कट गए हें, उन्हें मुआवजा भी दिया जा रहा है।
सिंधिया फार्म में भी एक और मकान शारदा नदी में समाया
बिजुआ। क्षेत्र के सिंधिया फार्म में शारदा नदी का कटान बुधवार को दोपहर बाद फिर शुरू हो गया। एक दिन की शांति के बाद नदी ने फिर से कटान तेज कर दिया, जिससे आरती पत्नी छांगुर का मकान नदी में समा गया। इससे पहले कटान के कारण 13 मकान यहां शारदा नदी में विलीन हो चुके हें। नदी बहुत तेजी से कटान कर रही है, जिससे सिंधिया फार्म के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। नदी किनारे रहने वाले लोग अपने घरों से घरेलू सामान निकालकर सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर ले जा रहे हैं। विकासखंड बिजुआ की ग्रामपंचायत जौहरा गुजारा के मजरा सिंधिया गांव में ग्रामीणों के पक्के घर एक-एक कर नदी में समाते जा रहे हैं। अब तक पचासों एकड़ कृषि योग्य भूमि भी शारदा नदी में समाहित हो चुकी है, जिससे किसानों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। संवाद
शारदा की तेज धारा में समाता हुआ नेकपाल का घर। स्रोत : वीडियो ग्रैब
शारदा की तेज धारा में समाता हुआ नेकपाल का घर। स्रोत : वीडियो ग्रैब