उफ, इतने मरीज कैसे सभी को देखें डॉक्टर
मंगलवार को सीएमएस ने देखे मरीज, पलिया तहसील दिवस में रहे सीएमओ
डॉक्टर कक्ष के बाहर सुबह से लगता है रेला
पसीने से तरबतर हो जाते हैं मरीज और डॉक्टर
जिला अस्पताल में इलाज की व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए ओपीडी में मरीज देखने की जिम्मेदारी सीएमओ और सीएमएस समेत अन्य चिकित्साधिकारियों को दी गई है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। शासन के निर्देश बाद भी डॉक्टरों की कमी के कारण रोजाना पर्चे बनवाने के बाद भी तमाम मरीज बेहाल होकर बिना परामर्श ही लौट जाते हैं। मंगलवार को ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग) में सभी डॉक्टर मौजूद थे। इसके बाद भी दो बजे के बाद बिना परीक्षण कराए ही मरीज लौटने लगे। आलम यह रहा कि 1265 मरीजों ने पर्चे बनवाए थे। मंगलवार को मरीजों की भीड़ के कारण ओपीडी में सात डॉक्टरों के अलावा सीएमएस ने भी नेत्र रोगियों का अपने कक्ष में परीक्षण करते देखे गए, हालांकि सीएमओ पलिया के तहसील दिवस में जाने के कारण मरीज नहीं देख पाए। वहीं अन्य चिकित्साधिकारियों ने ओपीडी में मरीज देखना अभी तक शुरू नहीं किया है।
जिला अस्पताल में दवा लेने केे लिए सुबह सात बजे से पर्चा काउंटर पर मरीजों की भीड़ लगने लगती है। मंगलवार को बाह्य रोगी विभाग में दो फिजीशियन, एक मेडिकल अफसर, एक बाल रोग विशेषज्ञ, एक ईएनटी, एक नेत्र रोग के डॉक्टर मरीज को देखते मिले। मरीजों ने बताया कि आज डॉक्टरों की संख्या अन्य दिनों से बेहतर थी, क्योंकि अन्य दिनों में तीन या चार डॉक्टर ही मिलते हैं। खास बात यह रही कि सीएमएस भी आज मरीज देख रहे थे। जानकार मरीजों ने बताया कि जब तक डाक्टर मेडिकल वाडों को निरीक्षण करके आते हैं तब तक उनके कक्ष के आगे सैकड़ो की लाइन लग चुकी होती है, वहीं डॉक्टर भी ज्यादा से ज्यादा मरीजों को देखने की फिराक में रहते हैं। वहीं डॉक्टर कहते हैं कि एक मरीज का परीक्षण करने और सलाह देने में आठ से 15 मिनट तक का समय लगता है, इसलिए इतनी संख्या में मरीजों की जांच करके उन्हें परामर्श कैसे दिया जा सकता है। यही वजह है कि परेशान होकर मरीज बगैर परामर्श के ही अपने घरों को वापस लौट जा रहे हैं। मरीजों की अधिकता के कारण डॉक्टर भी जल्दी जल्दी में मरीजों को निपटाने में लगे रहते हैं, जिससे डॉक्टर न तो मरीजों को ढंग से देख पाते हैं और न ही उन्हें उचित परामर्श ही दे पाते हैं।
यह है मरीज देखने का मानक
सीएमएस डॉ.मनोज कुुमार का कहना है मानक के अनुसार प्रतिदिन अधिकतम तीस से चालीस मरीज ही देखे जा सकते हैं। डॉक्टर इतने मरीजों को विधिवत देखकर परामर्श दे सकता है। लेकिन यहां पर सभी डॉक्टर रोजाना सौ से अधिक मरीजों को देख रहे हैं।
यह है स्टाफ
सीएमएस ने बताया कि जिला अस्पताल में 26 पद होंने चाहिए। लेकिन तैनाती सिर्फ 17 की है। इसमें दो फिजीशियन, एक नेत्र रोग, एक ईएनटी, तीन सर्जन, दो एनेस्थीसिया, दो आर्थो सर्जन, दो इमरजेंसी मेडिकल अफसर, एक रेडियोलाजिस्ट और एक पैथोलॉजिस्ट की ही तैनाती है, जबकि दो फिजीशियन दो इमरजेंसी मेडिकल अफसर और एक रेडियोलाजिस्ट का पद रिक्त है।
सीएमएस ने शुरू किया मरीजों को देखना
मुख्य सचिव के आदेश के बाद जिला अस्पताल के सीएमएस एवं नेत्र सर्जन डॉ.मनोज कुुमार ने मरीज देखना शुरू कर दिया है। सोमवार को उन्होंने नेत्र कक्ष में रही बैठक मरीजों को देखा, लेकिन विभागीय काम को लेकर सीएमएस ने मंगलवार को अपने कक्ष में मरीजों को देखा। दो घंटे की ओपीडी में उन्होंने करीब तीस मरीजों को परीक्षण किया।
प्रशासनिक अधिकारी नहीं देख रहे मरीज
मुख्य सचिव दीपक सिंघल के आदेश के बाद भी सेहत महकमे के प्रशासनिक अधिकारियों ने अभी तक मरीजों को देखना शुरू नही किया है। जबकि मरीजों की बढ़ती संख्या को लेकर मुख्य सचिव ने सीएमओ, एडिशनल सीएमओ और डिप्टी सीएमओ को मरीज देखने के निर्देश दिए थे। जिलें में एक सीएमओ, दो एडिशनल सीएमओ डॉ. मातादीन एवं डॉ.बीवी राम सहित तीन डिप्टी सीएमओ डॉ. बलबीर सिंह, डॉ.रवींद्र शर्मा और डॉ. रवींद्र नाथ तैनात हैं। हालांकि मंगलवार को सीएमओ ने अपने को तहसील दिवस में होना बताया।