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आशीष मिश्र की जमानत आदेश में छूटीं धाराएं

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लखीमपुर खीरी। तिकुनिया हिंसा में हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद भी आशीष मिश्र मोनू की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। बृहस्पतिवार को आए हाईकोर्ट के जमानत आदेश में धारा 302 और 120बी आईपीसी का उल्लेख ही नहीं था। शुक्रवार को हाईकोर्ट में दाखिल संशोधन अर्जी दाखिल की गई।
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आशीष मिश्र मोनू की जमानत अर्जी दाखिल करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता सलिल श्रीवास्तव ने शुक्रवार को जमानत आदेश में संशोधन के लिए अर्जी लखनऊ हाईकोर्ट बेंच में दाखिल की। रजिस्टार लिस्टिंग की ओर से सोमवार के लिए जस्टिस राजीव सिंह की अदालत में सुनवाई के लिए लगाया गया है। वहीं, लखीमपुर में आशीष मिश्र की ओर से अदालत में पैरवी करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता अवधेश सिंह ने बताया कि मूल जमानत प्रार्थना पत्र में धारा 302 और 120 बी का उल्लेख किया गया था, लेकिन संभव है कि लिपिकीय चूक के चलते धारा 302 और 120बी आईपीसी का उल्लेख छूट गया होगा। इस औपचारिक संशोधन के लिए उम्मीद है कि सोमवार को अदालती मंजूरी मिल जाएगी। इसके बाद ही संशोधित जमानत आदेश पर जिला अदालत में जमानतदार के दाखिला की कार्यवाही की जाएगी। संवाद
जमानत मिली पर नहीं जाएंगे राज्य से बाहर
लखीमपुर खीरी। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अपने 17 पेज के लंबे जमानत आदेश में पूरे तिकुनिया हिंसा की तस्वीर खींचते हुए जमानत आदेश भले ही मंजूर कर लिया है, लेकिन आशीष मिश्र मोनू पर राज्य के बाहर न जाने की पाबंदी लगाई है। अदालत ने अपने फैसले में यह स्पष्ट किया है कि बिना अदालती मंजूरी के आशीष मिश्र मोनू राज्य से बाहर नहीं जाएंगे।
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