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Lakhimpur Kheri News: शारदा पार बसे रामपुर को सड़क का इंतजार

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गांव का एकमात्र कीचड़ भरा रास्ता। स्रोत: ग्रामीण
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बिजुआ। शारदा नदी के दूसरी पार बसे ग्राम पंचायत रामनगर कलां के मजरा रामपुर में करीब 35 साल बाद भी पक्की सड़क नहीं बन सकी है। करीब एक हजार आबादी वाले गांव में सड़क, स्कूल, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है।
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बारिश में कच्चा रास्ता कीचड़ और पानी से लबालब हो जाता है। इससे गांव का आवागमन मुश्किल हो जाता है और ग्रामीणों को ट्रैक्टर का सहारा लेना पड़ता है। रामपुर पहुंचने के लिए खालेपुरवा से करीब पांच किलोमीटर लंबा कच्चा मार्ग है। बारिश में बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो जाता है। बीमार और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने में भी परेशानी होती है।
ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में प्राथमिक विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र नहीं है। करीब 300 बच्चों को शिक्षा के लिए दूसरे गांवों का रुख करना पड़ता है। टीकाकरण, पुष्टाहार और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ भी नियमित नहीं मिल पा रहा है। सड़क न होने से बरसात में बच्चों की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित होती है।
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गांव में पानी की टंकी का निर्माण करीब दो साल से अधूरा पड़ा है। ग्रामीण खराब गुणवत्ता वाला पानी पीने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि दूषित पानी से अक्सर लोग बीमार पड़ते हैं। शारदा नदी के कटान और बाढ़ से गांव हर साल प्रभावित होता है। बाढ़ में गांव का संपर्क आसपास के इलाकों से कटकर टापू जैसा हो जाता है। जंगली और हिंसक जानवरों का खतरा भी बना रहता है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार मांग और शिकायत के बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ। रामप्रसाद, मोहनलाल, नारायण कुमार, रामकिशुन, मोतीलाल, प्रहलाद, राधेश्याम और नीरज चौहान समेत ग्रामीणों ने कहा कि चुनाव के समय विकास के वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव बाद उनकी समस्याओं की सुध लेने कोई नहीं आता। ग्रामीणों ने जब तक पक्की सड़क नहीं, तब तक वोट नहीं का ऐलान किया है।

बरसात में शारदा नदी में बाढ़ आने से आने-जाने में बहुत कठिनाई होती है। रामपुर पहुंचने के लिए लगभग 70-75 किलोमीटर का चक्कर काटना पड़ता है। फिर भी गांव तक पहुंचने के लिए ट्रैक्टर आदि की व्यवस्था करनी पड़ती है। जब पानी कम होता है तो वहां हर सुविधा देने का प्रयास किया जाता है।
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-महावीर सिंह, खंड विकास अधिकारी बिजुआ
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