जिले में पेयजल व्यवस्था की हकीकत जाननी हो तो डीसी रोड स्थित कांशीराम कॉलोनी में जाकर सच्चाई सामने आ जाएगी। इस कॉलोनी की ये स्थिति है तो देहात के इलाकों की क्या हालत होगी, शायद इसे बताने की भी जरूरत नहीं। पड़ोस में स्थित जीआईसी ग्राउंड पर दशकों पुराने ओवरहेड टैंक से यहां पानी सप्लाई दी जाती है, लेकिन सफाई न होने के कारण यह लीक हो चुका है, इसलिए इसे फुल नहीं किया जाता। मुश्किल से सुबह आधा घंटे पानी की सप्लाई होता है, जो तीसरी और चौथी मंजिल तक नहीं पहुंचता। इसके अलावा कॉलोनी में तीन इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हैं, जिसमें से एक खराब है, जबकि एक में काफी देर में पानी आता है और कम निकलता है। तीसरे हैंडपंप का पानी भी गंदा है, रखने पर पीला पड़ जाता है। पानी की इस समस्या के बाद भी नगर पालिका परिषद और प्रशासन के अधिकारी समुचित पेयजल व्यवस्था का दावा कर रहे हैं। अमर उजाला ने व्यवस्था का जायजा लिया तो तस्वीर कुछ और ही सामने आई। प्रस्तत है एक रिपोर्ट :
लखीमपुर खीरी। वर्ष 2010 में बनकर तैयार हुई कांशीराम कॉलोनी चार साल पहले तक शहर की किसी वीआईआईपी कॉलोनी से कम नहीं थी, लेकिन आज यहां लोगों को पीने का पानी तक नहीं मिल पा रहा है। कॉलोनी से सटे जीआईसी ग्राउंड पर बने ओवरहेड टैंक से यहां की पाइप लाइन को जोड़ा गया है। घरों में पानी की सप्लाई भी दी गई है। पेयजल व्यवस्था के लिए इंडिया मार्का हैंडपंप भी लगे हैं, लेकिन पीने का पानी इतना गंदा है कि लोग बूंद बूंद साफ पानी को तरस रहे हैं।
कांशीराम कॉलोनी 20 ब्लाक में विभाजित है। इसमें कुल 320 आवास बने हैं, जिसमें सभी फुल है। चंद आवासों को छोड़कर सभी में पांच से 10 लोगों तक का परिवार रहता है। इस तरह करीब 15 सौ लोग कॉलोनी में रहते हैं। यहां की पेयजल व्यवस्था पर नजर डालें तो कॉलोनी में सुबह सात से आठ के बीच पाइप लाइन से पानी आता है, लेकिन यह पानी पहली और दूसरी मंजिल तक ही जाता है। पानी इतना गंदा होता है कि उससे हाथ मुंह धोना तो दूर कपड़े तक नहीं धोए जा सकते। मुश्किल से आधे घंटे पानी की सप्लाई होती है। कॉलोनी में तीन हैंडपंप लगे, जिनकी हालत ये है कि एक हैडपंप खराब हो चुका है तो दूसरे को काफी देर तक चलाने पर पानी निकलता है। वह भी कुछ देर रखने पर पीला पड़ जाता है, जबकि तीसरे की हालत कुछ ठीक है, लेकिन पानी इसका भी पीने लायक नहीं है।
चार मंजिल तक नहीं पहुंचता पानी
सबसे बड़ी समस्या चार मंजिल वालों के लिए है। वे कहते हैं कि उनके यहां पानी कभी नहीं पहुंचता।
नहीं हुई सुनवाई
कॉलोनी निवासी रमेश लाल, द्वारिका, जगदीश आदि बताते हैं कि हैंडपंप खराब होने पर खुद ही ठीक कराना पड़ता है। वे लोग कई बाद नगर पालिका से लेकर एसडीएम और डीएम को समस्या बताने गए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
कांशीराम कॉलोनी वालों ने कहा
पानी की बहुत है परेशानी
80 वर्षीय कमला देवी का कहना है कि अधिकारी चाहें तो पहले की तरह उन्हें पानी मिल सकता है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है, जिससे बहुत परेशानी होती है।
कई बार प्यासा सोना पड़ता है
नूरजहां कहती हैं कि कई बार रात में प्यास लगने पर नींद खुल जाती है। पानी नहीं होता है तो प्यासे ही सोना पड़ता है। क्योंकि हैंडपंप दूर लगा है।
पूरी नहीं हो पाती नींद
गृहिणी पूनम का कहना है कि इस समय सुबह से ही तेज धूप हो जाती है। सूरज निकलने से पहले ही पानी भरकर रखना पड़ता है, इसलिए वह और पूरा परिवार पूरी नींद नहीं सो पाते।
घंटों लगना पड़ता है लाइन में
अशोक कुमार बताते हैं सुबह जरा सी देर होने पर हैंडपंप पर भीड़ लग जाती है, जिससे घंटों लाइन में लगना पड़ता है। इससे काफी दिक्कत होती है।
बीमार हो रहे हैं लोग
अजय प्रकाश का कहना है कि कॉलोनी में हर किसी को पेट की बीमारी है। वजह है कि यहां का पानी काफी गंदा है, जिससे लोग बीमार हो रहे हैं।
कोई सुनने को तैयार नहीं
सुरेंद्र कुमार मिश्रा का कहना है कि उन्होंने पेयजल समस्या के बाबत कई बार अधिकारियों को बताया, लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ।
पेयजल व्यवस्था दुरुस्त बनाए रखने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। कांशीराम कॉलोनी में पेयजल की समस्या के बारे में जानकारी नहीं है। फिलहाल कहीं कोई समस्या है तो उसे दिखवाएंगे और जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी की जाएगी।
-आकाशदीप, डीएम