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Lakhimpur Kheri News: करोड़ों की परियोजना... फिर भी माथुरपुर कटान की जद में

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घाघरा नदी की कटान की जद में ग्रामीणों के आवास। स्रोत, ग्रामीण
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रमियाबेहड़। खेती-बाड़ी सब नदी में गवां चुके ग्रामीणों पर अब उनका आशियाना उजड़ने का खतरा मंडराने लगा है। विगत वर्ष माथुरपुर में घाघरा नदी पर बनी करीब साढ़े चार करोड़ रुपयों की परियोजना कट चुकी है। वर्तमान में छह करोड़ रुपये की परियोजना पर काम चल रहा है, लेकिन खतरा अभी कम नहीं हुआ है।
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सुजानपुर के गांव माथुरपुर के ग्रामीण राम प्रसाद भार्गव, संतू, ईश्वरदीन, तेजी और कंधई आदि के घर घाघरा नदी के कटान की जद में हैं। ग्रामीणों ने बताया कि घाघरा नदी में एक जुलाई को पानी बढ़ा था। बांध में लगाए गए जियो ट्यूब पानी के बहाव में एक तरफ से धंस कर क्षतिग्रस्त हो गए। अब नदी में पानी कम हो गया है। इससे कटान का खतरा कम हो गया है। घाघरा नदी में पानी बढ़ने पर कटान का खतरा बढ़ जाता है।

सहायक अभियंता बलराम गुप्ता ने बताया, आबादी को कटान से बचाने के लिए करीब छह करोड़ की लागत की परियोजना पर कार्य किया जा रहा है। जिसकी लंबाई करीब 780 मीटर है। आरबीएम भरकर गैबियान क्रैट लगाई गई हैं और परक्यूपाइन को बांधने के लिए बांस-बल्ली का उपयोग किया गया है। परियोजना पूरी तरह सुरक्षित है।
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इन गांवों का मिट चुका वजूद
बिचला, बरूही, घोड़ाघाट, जित्तनपुरवा, गोड़ियनपुरवा, बिंटोलिया, देवमनिया, खैरीपुरवा, ठकुरीपुरवा, पसियनपुरवा, मोतीपुरवा, हुलासपुरवा, निबियापुरवा, मझरा, टपरीपुरवा समेत अन्य कई गांवों का घाघरा नदी बीते वर्षों में भीषण कटान कर नामोनिशान मिटा चुकी है।
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