लखीमपुर खीरी। कमर, गर्दन, कंधे और घुटनों के दर्द में लोग अक्सर खुद दर्द की दवा लेने लगते हैं। इससे कुछ समय राहत मिलती है, लेकिन दर्द दोबारा लौट आता है। जिला अस्पताल की फिजियोथेरेपी यूनिट में ऐसे मरीजों को उपचार और व्यायाम के जरिये राहत देने की कोशिश की जा रही है। यहां रोज करीब 15 से 20 मरीज पहुंच रहे हैं।
फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. सईद ने बताया कि महिलाओं में कंधे, गर्दन और कमर दर्द की समस्या अधिक देखने को मिलती है। लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठने, शारीरिक गतिविधि कम होने और गलत पोश्चर से परेशानी बढ़ सकती है। मरीज की स्थिति के अनुसार थेरेपी और व्यायाम कराया जाता है।
यूनिट में एक्सरसाइज साइकिल, ट्रैक्शन मशीन, डायाथर्मी, गर्दन और कमर की ट्रैक्शन मशीन और अल्ट्रासाउंड मशीन समेत अन्य उपकरण उपलब्ध हैं। इनसे दर्द कम करने, मांसपेशियों की जकड़न दूर करने और प्रभावित हिस्से की गतिविधि बेहतर करने में मदद की जाती है।
ऑपरेशन के बाद भी जरूरी
ऑपरेशन या चोट के बाद प्रभावित अंग की गतिविधि सामान्य करने में परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार फिजियोथेरेपी कराई जाती है। नियमित थेरेपी और बताए गए व्यायाम से शरीर की गतिविधियां सामान्य करने में मदद मिलती है।
सर्वाइकल को न करें नजरअंदाज
फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. विवेक तिवारी ने बताया कि सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस जानलेवा बीमारी नहीं है, लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित कर सकती है। समय पर पहचान और उचित उपचार से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। सही पोश्चर, नियमित व्यायाम और दिनचर्या में सुधार के साथ फिजियोथेरेपी से परेशानी कम करने में मदद मिलती है।
विश्व फिजियोथेरेपी दिवस पर सलाह
फिजियोथेरेपिस्टों ने लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठने से बचने, काम के दौरान सही पोश्चर रखने और चिकित्सक या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से नियमित व्यायाम करने की सलाह दी है। लगातार दर्द होने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। चोट या ऑपरेशन के बाद बताई गई फिजियोथेरेपी नियमित करानी चाहिए। अचानक या बहुत तेज दर्द होने पर बिना सलाह के व्यायाम नहीं करना चाहिए।