बाघों ने डाला डेरा, दिखाई पड़ रहे हिरनों के झुंड
भीषण गर्मी में मैलानी और भीरा के जंगलों से निकल कर उल्ल नदी में मिलने वाला बरौछा नाला इन दिनों बाघों की दहाड़ और हिरनों के कुलाचों से गुलजार है। लगता है जैसे जंगली जानवरों ने जंगल छोड़कर बरौछा नाले को ही अपना ग्रीष्मकालीन आशियाना बना रखा हो। इन दिनों बरौछा नाले के आसपास बाघों को चहलकदमी करते, ठंडे पानी के पास पेड़ों की शीतल छांव में आराम फरमाते देखा जा सकता है, कुछ ऐसा ही हाल हिरनों का कहना है।
कड़ी धूप और भीषण गर्मी से दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैलानी और भीरा रेंज के जंगल में तालाब और पोखर सूख गए हैं। नदी-नालों में पानी कम हो गया है। केवल जंगल के बीच में निकली नहर में पानी के सहारे जंगली जानवर अपनी प्यास बुझा रहे हैं। इसके चलते एक बार फिर पानी की तलाश में जंगली जानवरों का जंगल से बाहर आने का सिलसिला शुरू हो गया है।
किशनपुर सेंक्चुरी और मैलानी रेंज जंगल के बीच से निकला बरौछा नाला उल्ल नदी में मिलता है। बरौछा नाले में पूरे साल पानी रहने से यह जंगल की लाइफ लाइन बना हुआ है। अब जबकि जंगल के अधिकतर ताल-तलैया सूख चुके है, तो बाघ, तेंदुआ ही नहीं शाकाहारी पशुओं ने भी बरोछा नाला के आस-पास अपना डेरा डाल रखा है। इससे बाघों को पर्याप्त भोजन और पानी मिल रहा है। इन दिनों बरौछा नाले के किनारे अक्सर बाघों को विचरण करते देखा जा रहा है। इस इलाके में बारहसिंगा, चीतल और पाढ़ा के अलावा विभिन्न प्रजातियों के हिरनों और शाकाहारी जीवों के झुुंड के झुंड दिखाई दे रहे हैं।
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जंगल में पानी की कमी नहीं होने दी जाएगी। जरूरत पड़ी तो जंगल के अंदर और बाहरी किनारों के तालाबों में पानी भरा जाएगा।
-अखिलेश पांडे, डीएफओ, साउथ खीरी