लखीमपुर खीरी। जिले में वाॅशिंग सेंटरों से वाहनों की धुलाई का कारोबार फलफूल रहा है। वाॅशिंग सेंटरों का न तो कहीं पंजीकरण न ही एनओसी है। खास बात यह कि कोई जिम्मेदार भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। अनदेखी में रोजाना पानी बर्बाद होकर नालियों में बह रहा। इस कारोबार से कारोबारी तो फायदा उठा रहे, लेकिन सरकारी खजाने में कुछ भी नहीं जा रहा।
जिले में 150 से अधिक वाॅशिंग सेंटर खुले हैं, इसमें अकेले शहर में नौरंगाबाद चौराहा, डीसी रोड, गोला रोड, बेहजम रोड, मेला मैदान, नौरंगाबाद, देवकली रोड, इमली चौराहा, श्मशान घाट रोड, निघासन रोड समेत प्रमुख मार्गों व हाईवे के किनारे 60 से अधिक धुलाई सेंटर संचालित हैं। इसके अलावा पलिया, निघासन, मोहम्मदी, गोला, धौरहरा आदि क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में अवैध रूप से वाॅशिंग सेंटर संचालित हैं।
अनुमानित एक बाइक की धुलाई पर 50 से 70 लीटर पानी खर्च होता, जबकि एक कार पर 100 से 120 लीटर। वहीं, ट्रैक्टर, ट्रक, बस आदि वाहनों पर 500 लीटर तक पानी बर्बाद होता है। औसतन एक दुकान पर रोजाना 10 से 15 या इससे अधिक भी वाहनोंं की धुलाई का काम किया जाता है। धुलाई के बाद निकलने वाला पानी नालियों या सड़क किनारे बहता है। इससे कहीं न कहीं गर्मी और लगातार गिरते भूजल स्तर के बीच पानी के इस तरह अनियंत्रित इस्तेमाल पर सवाल उठ रहे हैं। इधर, अंधाधुंध पानी की बर्बादी से कहीं न कहीं जलस्तर पर असर पड़ा होगा।
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नगर पालिका में भी पंजीकरण नहीं
शहर में कोई भी व्यावसायिक कारोबार के लिए नगर पालिका में पंजीकरण की जरूरत है, लेकिन वाॅशिंग सेंटरों का यहां भी कोई पंजीकरण नहीं है। नगर पालिका जल कल विभाग के जेई जितेंद्र सिंह ने कहा कि उनके विभाग में कोई भी पंजीकरण नहीं है। यह सेंटर बिना पंजीकरण के ही चल रहे हैं। इनको नोटिस भेजा जाएगा।
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भू-गर्भ पोर्टल पर भी पंजीकरण नहीं
-जमीन से पानी निकालने के लिए के लिए भूगर्भ जल विभाग से एनओसी लेने का नियम है, लेकिन दुर्भाग्य है कि जिले में अब तक किसी ने भी एनओसी नहीं ली है। एनओसी लेने के लिए कारोबारी को भूगर्भ जल विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होता और उसमें दिखाना होता है औसतन एक दिन कितनी पानी की खपत होगी। लंबी प्रक्रिया के बाद एनओसी जारी करने का नियम है। विभाग के अनुसार, एक हजार लीटर पर 60 पैसे का शुल्क जमा करना होता है।
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वर्जन
वाॅशिंग सेंटर की एनओसी भू-गर्भ जल विभाग से लेना अनिवार्य है। अगर कोई भी एनओसी नहीं है तो इसकी प्रक्रिया जल्द ही शुरू कराएंगे।
-आशीष कुमार, सहायक अभियंता, भूगर्भ जल विभाग